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अखिलेश राज में किसानों हालात बद से बदतर राष्ट्रीय लोकदल

अखिलेश राज में किसानों हालात बद से बदतर राष्ट्रीय लोकदल

अखिलेश राज में किसानों हालात बद से बदतर राष्ट्रीय लोकदल

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सपा सरकार के शासनकाल में किसानों की बद से बदत्तर स्थिति होती जा रही है जिससे लगातार झुब्ध किसान आत्महत्या कर रहे हैं। यह आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि जहां प्रदेश सरकार किसान वर्ष घोषित करके किसानों का हक मारकर उनके मुंह से निवाला छीनने का काम कर रही है वहीं केन्द्र सरकार भी पांच साल में किसानों की आय दोगुनी करने का दिवा स्वप्न दिखाकर उनकी हालत का उपहास उड़ा रही है। वर्तमान समय में कृषि उपज को उचित मूल्य दिलाने वाले बाजार का संकट किसानों की मुश्किलों का सबब बना हुआ है, किसानों को अपनी उपज बेचने को लेकर भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन सरकारों के पास किसानों के लिए कुछ नहीं है।चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने किसानों को उनकी फसल बर्बादी के मुआवजे में तो जमकर हेरा फेरी की है जिससे किसानों की एक के बाद एक लगातार तीन फसलें बर्बाद हो गयी और सरकार ने कुछ नहीं किया। सरकार को गेहूं पर 200 रुपए प्रति कुन्तल के हिसाब से बोनस देना चाहिए तथा सरकारी खरीद सुनिष्चित की जानी चाहिए। किसान वर्ष में किसानों का हरसम्भव सहयोग करने का दावा करने वाली सरकार की लगातार पोल खुल रही है। चीनी मिलों के मनमानेपन का आलम यह है कि पष्चिमी उ.प्र. की कई मिलों ने अब तक किसानों को एक धेला भी भुगतान नहीं किया जबकि पेराई सत्र समाप्त होने जा रहा है। हजारों करोड़ रुपये का गन्ना बेचने के बाद भी भुगतान नहीं मिलने से किसानों में बढ़ती नाराजगी सपा सरकार को सबक सिखायेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को कृषि उपकरण तथा कीटनाशक दवाओं सहित कृषि सम्बधित वस्तुओं पर अनुदान दिया जाना चाहिए। चौहान ने मांग करते हुये कहा कि बरेली तथा बांदा सहित अन्य जनपदों के मृतक किसानों के परिजनों को 25 लाख मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाय। वादे के मुताबिक गन्ना मूल्य का 280 रुपए प्रति कुन्तल के हिसाब से एकमुश्त भुगतान कराया जाय तथा किसानों के द्वारा लिये गये कृषि लोनों का ब्याज माफ किया जाय। जिससे किसानों की हालत में सुधार हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि वनरोजों के उत्पात से विगत कई वर्षों से दलहन और तिलहन के उत्पादन में भारी कमी आयी है जिससे भी किसानों को आर्थिक स्थिति पर प्रभाव पड़ रहा है। वनरोजों से निजात के लिए भी ठोस कदम उठाये जाने चाहिए। 

 

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