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उत्तर प्रदेश

घाघरा बाढ़ में, अपने घरों को छोड़ कहीं और जाने को मजबूर हुए लोग

रिमझिम-रिमझिम बारिशों की फुहारें भले ही आम लोगों को अच्छी लगती हो लेकिन घाघरा के किनारे बसे लोगों की रूह कांप उठती है। उन्हें गर्मी से तो जरूर पलभर के लिए निजात मिल जाती है लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें अपने ही बनाए हाथ से उन आशियानों को उजाड़ना पड़ता है जिसे उन्होंने पसीना बहाकर बनाया

घाघरा बाढ़ में, अपने घरों को छोड़ कहीं और जाने को मजबूर हुए लोग

बहराइच. रिमझिम-रिमझिम बारिशों की फुहारें भले ही आम लोगों को अच्छी लगती हो लेकिन घाघरा के किनारे बसे लोगों की रूह कांप उठती है। उन्हें गर्मी से तो जरूर पलभर के लिए निजात मिल जाती है लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें अपने ही बनाए हाथ से उन आशियानों को उजाड़ना पड़ता है जिसे उन्होंने पसीना बहाकर बनाया था। उन्हें मालूम है कि ऐसा न करने पर घाघरा की लहरों में उनकी बनाई हुई सारी गृहस्थी बहकर नष्ट हो जाएगी। घाघरा के किनारे बसे लोग अब नए आशियाने ढूंढने को मबजूर हैं और अपना आशियाना उजाड़कर दूसरी जगह ले जा रहे हैं।

गोपिया बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है। जलस्तर बढ़ने से घाघरा में बाढ़ आ चुकी है जिससे कटान और तेजी से हो रह है। कटान शुरू होने से तटवर्ती ग्रामीणों में दहशत में है।प्रत्येक तटवर्ती ग्रामीण आशियानों को उजाड़कर सुरक्षित ठिकानों की और जा रहे हैं। मुख्य रूप से महसी तहसील के गोलागंज, कायमपुर, जर्मापुर व पचदेवरी में बाढ़ के असर ज्यादा हैं।

जलस्तर बढ़ता देख फ्लड पीएसी कटान प्रभावित क्षेत्र बौण्डी पहुंच गई है। सीतापुर की बाढ़ राहत दल सेकेण्ड बटालियन पीएसी बल के प्लाटून कमांडर राजेंद्र सिह के अनुसार 30 सदस्य पीएसी बटालियन कटान प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों के सहयोग के लिए हमेशा तत्पर रहेगी।

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