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संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस की पूर्व संध्या पर सी.एम.एस.छात्रों व शिक्षकों ने लिया विश्वएकता का संकल्प

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस की पूर्व संध्या पर सी.एम.एस.छात्रों व शिक्षकों ने लिया विश्वएकता  का संकल्प

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस की पूर्व संध्या पर सी.एम.एस.छात्रों व शिक्षकों ने लिया विश्वएकता का संकल्प

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लखनऊ, 23 अक्टूबर। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के 57000 छात्रों, शिक्षकों व प्रधानाचार्याओं ने आज संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस (24 अक्टूबर) की पूर्व संध्या पर विश्व एकता व विश्व शान्ति का संकल्प लिया। सी.एम.एस. के सभी 18 कैम्पसों में आज प्रार्थना सभाओं में समारोह आयोजित किये गये, जहाँ छात्रों ने एकता, शान्ति, सद्भाव व सौहार्द का वातावरण निर्मित करने का संकल्प व्यक्त किया। मुख्य समारोह सी.एम.एस. कानपुर रोड ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी व डा. (श्रीमती) भारती गाँधी, सी.एम.एस. प्रेसीडेन्ट प्रो. गीता गाँधी किंगडन, सी.एम.एस. के डायरेक्टर ऑफ स्ट्रेटजी, श्री रोशन गाँधी समेत सी.एम.एस. के सभी कैम्पस की प्रधानाचार्याएं एवं विभिन्न विभागों के प्रमुखों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए छात्रों व युवा पीढ़ी से अपील की कि वे एकता व शान्ति के राजदूत बनकर विश्व मानवता की भलाई के लिए कार्य करें।
    इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका के उपरान्त अमेरिका के नेतृत्व में विश्व के विभिन्न देशों के सहयोग से 24 अक्टूबर 1945 को विश्व की शान्ति की सबसे बड़ी संस्था ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ (यू.एन.ओ.) की स्थापना हुई।  विश्व की यह सबसे बड़ी संस्था दुनिया में एकता व शान्ति स्थापित करने को समर्पित है। 
    डा. गांधी ने आगे कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री जान टिम्बरजेन ने कहा है कि राष्ट्रीय सरकारें विश्व के समक्ष उपस्थित संकटों और समस्याओं का हल अधिक समय तक नहीं कर पायेंगी। इन समस्याओं के समाधान के लिए विश्व संसद आवश्यक है, जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ को मजबूती प्रदान करके प्राप्त किया जा सकता है। इसलिए प्रभावशाली वैश्विक प्रशासन के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ को प्रजातांत्रिक एवं शक्तिशाली बनाकर विश्व संसद का स्वरूप प्रदान करना चाहिए। डा. गाँधी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की विचारधारा और भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 51’ को आत्मसात कर विश्व को संभावित तीसरे विश्व युद्ध एवं परमाणु बमों की विभीषिका से बचाया जा सकता है।
    डा. गाँधी ने आगे कहा कि सी.एम.एस. पिछले 58 वर्षों से अपनी स्थापना के समय से ही विश्व एकता, विश्व शान्ति एवं मानवाधिकारों की आवाज उठाता रहा है और इसी क्रम में विगत 18 वर्षों से लगातार लखनऊ की सरजमीं पर ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों का अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ आयोजित कर रहा है। इस वर्ष ‘विश्व के मुख्य न्यायाधीशों का अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ का 19वाँ सम्मेलन 14 से 20 नवम्बर तक सी.एम.एस. कानपुर रोड ऑडिटोरियम में आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन विश्व एकता, विश्व शान्ति, परमाणु निरस्त्रीकरण एवं भावी पीढ़ी को सुरक्षित व सुखद भविष्य प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
 

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