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शान्तिपूर्ण विश्व व्यवस्था एवं सुरक्षित भविष्य’ का अधिकार अवश्य मिलेगा-न्यायविदों की राय

शान्तिपूर्ण विश्व व्यवस्था एवं सुरक्षित भविष्य’ का अधिकार अवश्य मिलेगा-न्यायविदों की राय

शान्तिपूर्ण विश्व व्यवस्था एवं सुरक्षित भविष्य’ का अधिकार अवश्य मिलेगा-न्यायविदों की राय

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लखनऊ, 19 नवम्बर। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, कानपुर रोड ऑडिटोरियम में आयोजित हो रहे ‘19वें अन्तर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन’ के चौथे दिन सारगर्भित परिचर्चा के दौरान 71 देशों से पधारे न्यायविद्ों व कानूनविद्ों ने कहा कि भावी पीढ़ी को ‘स्वच्छ वातावरण, शान्तिपूर्ण विश्व व्यवस्था एवं सुरक्षित भविष्य’ का अधिकार अवश्य मिलेगा। हम भावी पीढ़ी के हित में सतत् प्रयत्नशील रहेंगे और एक ‘नवीन विश्व व्यवस्था’ बनाकर ही दम लेंगे। इससे पहले, मुख्य अतिथि के रूप में पधारे विधानसभा सदस्य एवं भारतीय जनता पार्टी, उ.प्र. के जनरल-सेक्रेटरी श्री पंकज सिंह ने सम्मेलन के चौथे दिन का उद्घाटन किया जबकि समारोह की अध्यक्षता अफगानिस्तान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सैद यूसुफ हलीम ने की। 
    इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री पंकज सिंह, विधानसभा सदस्य एवं जनरल-सेक्रेटरी, भारतीय जनता पार्टी, उ.प्र., ने अपने संबोधन में कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य पूरे विश्व के बच्चों की भलाई है। एकता व शान्ति स्थापना के लिए सबसे जरूरी है कि मानव अधिकारों का पूरा सम्मान हो और हमारे संविधान खासकर अनुच्छेद 51 में यह बाकायदा सुनिश्चित किया गया है। अफगानिस्तान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सैद यूसुफ हलीम ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि ‘अन्तर्राष्ट्रीय कानून व्यवस्था’ लागू करना समय की मांग है क्योंकि इसी व्यवस्था के जरिए विश्वव्यापी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। ऐसे समय में जब विश्व के विभिन्न हिस्सों में बच्चों की सुरक्षा, उम्मीदों व उनकी जिन्दगियों पर खतरा मंडराता दिखाई दे रहा है, यह सम्मेलन विश्व के बच्चों की उम्मीदों पर खरे उतरने को प्रेरित करता है।
    इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के अन्तिम दिन आज विभिन्न देशों से पधारे न्यायविद्ों, कानूनविद्ों व अन्य प्रख्यात हस्तियों ने अलग-अलग पैरालल सेशन्स में एक नवीन विश्व व्यवस्था पर गहन चिन्तन, मनन व मंथन किया। सम्मेलन की परिचर्चा अलग-अलग पैरालल सेशन्स  में सम्पन्न हुई, जिनमें ‘एजूकेशन फॉर प्रमोटिंग वर्ल्ड यूनिटी एण्ड वर्ल्ड पीस’, ‘इस्टेब्लिसिंग रूल ऑफ लॉ’, ‘ह्यूमन राइट्स’, ‘ग्लोबल गवर्नेन्स स्ट्रक्चर’, ‘टैकलिंग ग्लोबल इश्यूज’ एवं ‘सस्टेनबल डेवलपमेन्ट’ आदि विषयों पर विचार-विमर्श का दौर चला। ‘एजूकेशन फॉर प्रमोटिंग वर्ल्ड यूनिटी एण्ड वर्ल्ड पीस’ थीम के अन्तर्गत ‘रोल ऑफ स्कूल्स एण्ड यूनिवर्सिटीज इन प्रमोटिंग ए कल्चर ऑफ यूनिटी एण्ड पीस’, ‘कन्टेन्ट ऑफ एजूकेशन फॉर द ट्वेन्टी फस्ट सेन्चुरी दैट शैल डिलीवर यूनिटी एण्ड पीस’, ‘आर्गनाईजेशनल एण्ड मेथेडोलॉजिकल प्रिन्सिपल्स फॉर एजूकेशन सिस्टम फॉर पीस’, ‘लॉ कोर्ट्स एण्ड रिलीजन’ एवं ‘लाईफलॉंग लर्निंग एण्ड एजूकेशन ऑफ यूथ फॉर पीस’ विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
    ‘ग्लोबल गवर्नेन्स स्ट्रक्चर’ थीम पर आयोजित पैरालल सेशन में ‘यू.एन. रिफार्म’, ‘नीड फॉर ए न्यू वर्ल्ड आर्डर आन डेमोक्रेटिक लाइन्स’, ‘स्ट्रक्चर ऑफ ग्लोबल डेमोक्रेसी’, ‘रोल ऑफ यूथ इन सोशल ट्रान्सफार्मेशन’ आदि विषयों पर व्यापक चर्चा-परिचर्चा हुई तो वहीं दूसरी ओर ‘टैकलिंग ग्लोब इश्यूज’ थीम के अन्तर्गत ‘रीजनल एण्ड इण्टरनेशनल टेरोरिज्म’, ‘एथनिक एण्ड सिविल वार, जेनोसाइड बाई मिसगाइडेड फोर्सेज’, ‘न्यूक्लियर प्रोलिफिरेशन एण्ड डिसआर्मामेन्ट’, ‘कान्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन’ एवं ‘रिफ्यूजी प्राब्लम’ पर चर्चा हुई। इसी प्रकार ‘इस्टेब्लिशिंग रूल ऑफ लॉ’, ‘हयूमन राइट्स’ एवं ‘सस्टेनबल डेवलपमेन्ट’ आदि थीम पर भी पैरालल सेशन्स आयोजित हुए।
    घाना की संसद के अध्यक्ष प्रो. एरोन माइकल ओक्याए ने कहा कि शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों को मिलना ही चाहिए। उन्हें सुरक्षित एवं सुखद वातावरण प्रदान करना हम वयस्क लोगों का कर्तव्य है, ये वो स्वयं से नहीं पा सकते। हमें अल्प सुविधाप्राप्त बच्चों की तरफ विशेष ध्यान देना होगा। विश्व के सभी बच्चों की जरूरतें समान होती हैं जैसे कि शिक्षा, सुरक्षा इत्यादि। यदि समाज विघटित होता है, तो बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। नाईजर कान्स्टीट्शनल कोर्ट के वाइस प्रेसीडेन्ट न्यायमूर्ति प्रो. नरे ओमारू ने कहा कि विश्व संसद सम्भव है लेकिन अन्तर्राष्ट्रीय कानून के नियमों को सामाजिक मानदण्डों के रूप में परिवर्तित किया जाना चाहिए जो कि सामाजिक राज्य बनाने वाले सभी राज्यों, व्यक्तियों और कानूनी संगठनों पर लागू हो। बेनिन सुप्रीम कोर्ट के प्रेसीडेन्ट डा. ओस्मान बटोको ने कहा कि बच्चों का हित सभी संस्थाओं का मुख्य मुद्दा होना चाहिए क्योंकि धरती की भलाई उन्ही के सुरक्षित भविष्य द्वारा सुनिश्चित की जा सकती है। 
    आज अपरान्हः सत्र में एक प्रेस कान्फ्रेन्स में मुख्य न्यायाधीशों के विचारों का निचोड़ पत्रकारों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए सम्मेलन के संयोजक डा. जगदीश गाँधी, प्रख्यात शिक्षाविद् व संस्थापक, सी.एम.एस. ने बताया कि लगभग सभी मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाशीशों व कानूनविदों की आम राय रही कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51(सी) विश्व की समस्याओं का एक मात्र समाधान है। भारतीय संविधान विश्व के अकेला ऐसा संविधान है जो पूरे विश्व को एकता के सूत्र में जोड़ने की बात कहता है। उन्होंने बताया कि सभी मुख्य न्यायाधीशों ने इस बात को माना कि वे मानवता की आवाज और बुलन्द कर सकते हैं परन्तु अन्तर्राष्ट्रीय कानून तभी प्रभावशाली रूप से लागू किया जा सकता है जब राजनीति से जुड़े लोग भी हमारे साथ मिलकर एक विश्व संसद बनाने का समर्थन दें।
    प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित ने 71 देशों से पधारे न्यायविद्ों, कानूनविद्ों व अन्य प्रख्यात हस्तियों के सम्मान में इन्दिरा गाँधी प्रतिष्ठान में ‘रात्रिभोज’ दिया। रंगारंग शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच सम्पन्न हुए रात्रिभोज में विभिन्न देशों से 
पधारे गणमान्य अतिथि भारत की संस्कृति व सभ्यता से रूबरू हुए, साथ ही लखनवी पकवानों का आनन्द उठाया। इन सभी अतिथियों ने प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित की सद्भावना की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सम्मेलन के संयोजक, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं सी.एम.एस. संस्थापक डा. जगदीश गाँधी ने भी श्री दीक्षित के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में श्री दीक्षित ने कहा कि विभिन्न देशों की प्रख्यात हस्तियों के लखनऊ आगमन से लखनऊ का नाम अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर सुशोभित हुआ है। मुझे विश्वास है कि इन न्यायविद्ों व कानूनविद्ों ने ‘एकता, शान्ति व सौहार्द’ की जो लौ यहाँ प्रज्वलित की है, उसका प्रकाश सारे विश्व में फैलेगा।
    श्री शर्मा ने आगे बताया कि दुनिया भर से पधारे न्यायविद्ों, कानूनविद्ों व अन्य प्रख्यात हस्तियों के सम्मान में रंगारंग साँस्कृतिक संध्या का आयोजन आज सायं सी.एम.एस. गोमती नगर (द्वितीय कैम्पस) ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने दीप प्रज्वलित कर ‘साँस्कृतिक संध्या’ का विधिवत शुभारम्भ किया। इस अवसर पर ताईवान से पधारे फेडरेशन ऑफ वर्ल्ड पीस एण्ड लव के सदस्यों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग कार्यक्रमों की छटा बिखेर कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
    इस अवसर पर न्यायविद्ों व कानूनविद्ों को शुभकामनाएं देते हुए उप-मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि बच्चों के हित में आप द्वारा किया जा प्रयास अवश्य रंग लायेगा और निश्चित रूप से संसार के सभी बच्चों  को एक दिन उनका मूलभूत अधिकार अवश्व उपलब्ध होगा। श्री मौर्य ने इस ऐतिहासिक सम्मेलन के आयोजन के लिए सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी की भूरि-भूरि प्रशसा की। श्री मौर्य ने कहा कि यह डा. गाँधी के ही प्रयास व परिश्रम का परिणाम है कि 71 देशों के न्यायविद् व कानूनविद् एक मंच पर एकत्रित हुए हैं।

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