शिक्षा

6 वर्षों की प्रतिपूर्ति की बकाया ,इसलिए यूपी का कोई भी निजी स्कूल नहीं देगा RTE के तहत दाखिला

6 वर्षों की प्रतिपूर्ति की बकाया ,इसलिए यूपी का कोई भी निजी स्कूल नहीं देगा RTE के तहत दाखिला

6 वर्षों की प्रतिपूर्ति की बकाया ,इसलिए यूपी का कोई भी निजी स्कूल नहीं देगा RTE के तहत दाखिला

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लखनऊ, 28 जनवरी। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसियेशन(UPSA)  के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया की संगठन की तरफ से शासन को एक पत्र लिखा गया है जिसमें आर.टी.ई. एक्ट के अंतर्गत प्रतिपूर्ति की धनराशि को देश के कानून के अनुसार अविलम्ब देने की प्रार्थना की गई है माननीय उच्चतम न्यायालय ने कहा कि धारा 12(1)(सी) में निजी स्कूलों से 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों को देने की अनिवार्यता अनुचित इसलिए नहीं है क्योंकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(2) के अन्तर्गत इन स्कूलों को सरकार प्रतिपूर्ति देगी। माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने निर्णय में लिखा कि आर.टी.ई. अधिनियम 2009 की धारा 12(2) के अन्तर्गत ही निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति की धनराशि दी जायेगी, जिससे कि निजी स्कूलों के संविधान के अनुच्छेद 19(जी) के मौलिक अधिकारों का हनन न हो।यहाँ उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013 में शासनादेश दिनाँक 20 जून 2013 के माध्यम से प्रतिपूर्ति की अधिकतम धनराशि रू. 450/- प्रति माह निर्धारित की थी जोकि पूर्णतया आर.टी.ई. अधिनियम 2009 की धारा 12(2) तथा सुप्रीम कोर्ट के दिनाँक 12 अप्रैल 2012 के निर्णय के विरूद्ध एवं देश के कानून का खुला उल्लंघन है।
आर.टी.ई. अधिनियम 2009 की धारा 12(2) में तथा सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल 2012 के निर्णय के अनुसार सरकारी स्कूलों में ‘प्रति-छात्र व्यय’ एवं ‘निजी स्कूल की प्रति छात्र फीस’ में जो भी धनराशि कम होगी, उसी का भुगतान प्रतिपूर्ति के रूप में निजी स्कूलों को शासन द्वारा किया जायेगा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(2) के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश आर.टी.ई. नियमावली 2011 के नियम 8(2) में इस प्रतिपूर्ति की गणना का फार्मूला दिया है जिससे प्रतिपूर्ति की धनराशि पारदर्शी रूप से हर वर्ष 30 सितम्बर को निकालकर सरकारी ‘प्रति-छात्र व्यय’ घोषित किया जाना चाहिये था। जबकि पिछले 6 वर्षों से उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘प्रति-छात्र व्यय’ हर वर्ष 30 सितम्बर को घोषित ही नहीं किया है जो कि कानून का खुला उल्लंघन है। इसी क्रम में तमिलनाडू की सरकार ने सरकारी गजट के माध्यम से अपने सरकारी स्कूलों में ‘प्रति-छात्र-व्यय’ को प्रकाशित भी किया है
अनिल अग्रवाल ने आखिर में कहा की उत्तर प्रदेश के निजी स्कूल कई वर्षों से इस बात को बार-बार कह रहे हैं। तथा बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौखिक रूप से पिछले 6 वर्षों से आश्वासन देते रहें हैं कि इस वर्ष आप दाखिले ले लीजिए एवं प्रतिपूर्ति की बकाया धनराशि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार, अगले वर्ष में निजी स्कूलों को पूरी बकाया धनराशि दे दी जायेगी और आगे से आर.टी.ई. एक्ट के अनुसार ही प्रतिपूर्ति की धनराशि दी जायेगी। 
किन्तु हर वर्ष निजी स्कूलों को अश्वासन ही मिलता रहा है वरन् प्रतिपूर्ती की बकाया धनराशि नहीं मिली। लेकिन अब अगर शासन ने पिछले 6 वर्षो की प्रतिपूर्ति की बकाया धनराशि को 
आर.टी.ई. अधिनियम 2009 की धारा 12(2) तथा सुप्रीम कोर्ट के 12 अप्रैल 2012 के निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों को अविलम्ब भुगतान नहीं किया तो यह देश के कानून का खुला उल्लंघन होगा एवं ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश का कोई भी निजी स्कूल शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत प्रवेश नहीं लेगा।

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