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बसंत पंचमी 2019, मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए करें यह जाप

बसंत पंचमी 2019, मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए करें यह जाप

बसंत पंचमी 2019, मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए करें यह जाप

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संपूर्ण भारतवर्ष में बसंत पंचमी त्यौहार बड़े हर्षो उल्लास के साथ विद्यालयों, घरों, कार्यालयों में मनाया जाता है,बसंत पंचमी का दिन विद्या की देवी सरस्वती का दिन होता है। बंसत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी के दिन बच्चे और महिलाएं पीले वस्त्र धारण करती हैं।

बसंत पंचमी के दिन सुबह बिस्तर छोड़ने से पहले अपने दोनों हाथों की हथेलियों को एकसाथ जोड़कर देखना चाहिए। उससे मां सरस्वती के साथ लक्ष्मी जी की कृपा आप पर बनेगी। क्योंकि एक शानदार श्लोक है कराग्रे बसते लक्ष्मी, कर मध्ये सरस्वती, कर मूले तू गोविदः प्रभाते कर दर्शनम्।

यानी हथेली मां सरस्वती का वास होता है जिनकों देखना मां सरस्वती के दर्शन करने के बराबर होता है।

आपको बता दें कि पीले रंग को बसंत का प्रतीक माना गया है। इस बार बसंत पंचमी 10 फरवरी को मनाई जाएगी। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विशेष रूप से पूजा की जाती है। मां सरस्वती को विद्या एवं बुद्धि की देवी माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती से विद्या, बुद्धि, ज्ञान का वरदान मांगा जाता है। आज हम विद्यार्थियों को बसंत पंचमी के दिन किए जाने वाले कुछ उपायों के बारें में बताने जा रहे है। जिसकी कृपा से आप मां सरस्वती की विशेष कृपा पा सकते हो। तो आइए नजर डालिए।

पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान:-

वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करते वक्त पीले या फिर सफेद कपड़े पहनने चाहिए।

ध्यान रहे कि काले और लाल कपड़े पहनकर मां सरस्वती की पूजा ना करें।

वसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके करनी चाहिए।

मान्यता है कि मां सरस्वती को श्वेत चंदन और पीले फूल बेहद पंसद है इसलिए उनकी पूजा के वक्त इन्हीं का इस्तेमाल करें।

पूजा के दौरान प्रसाद में दही, लावा, मीठी खीर अर्पित करनी चाहिए।

पूजा के दौरान माँ सरस्वती के मूल मंत्र "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" का जाप करें।

पूजा के दौरान करें इस मंत्र का जाप:-

इस दिन विशेष रूप से लोगों को अपने घर में सरस्वती यंत्र स्थापित करना चाहिये, और मां सरस्वती के इस विशेष मंत्र का 108 बार जप करना चाहिये।

मंत्र - ‘ऊँ ऐं महासरस्वत्यै नमः’ होली का आरंभ भी बसंत पंचमी से ही होता है। इस दिन पहली बार गुलाल उड़ाते हैं और बसंती वस्त्र धारण कर नवीन उत्साह और प्रसन्नता के साथ अनेक प्रकार के मनोविनोद करते हैं। ब्रज में भी बसंत के दिन से होली का उत्सव शुरू हो जाता है।

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