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भक्तिभाव व प्रार्थना से ही संभव है मानव का विकास - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

भक्तिभाव व प्रार्थना से ही संभव है मानव का विकास - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

भक्तिभाव व प्रार्थना से ही संभव है मानव का विकास - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

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लखनऊ, 15 सितम्बर। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर आॅडिटोरियम में आयोजित विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए बहाई धर्मानुयायी, प्रख्यात शिक्षाविद् व सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. (श्रीमती) भारती गाँधी ने कहा कि इस कलियुग में भक्तिभाव व प्रार्थना की ही महत्ता है और यही मानव के आध्यात्मिक विकास का सर्वसुलभ साधन है। प्रार्थना में असीम शक्ति होती है। सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना को ईश्वर जरूर स्वीकार करते हैं। डा. गाँधी ने आगे कहा कि प्रत्येक युग की आवश्यकताआंे व समस्याओं के अनुसार ही उस युग की शिक्षायें होती हैं। आज की आवश्यकता यह है कि एक ही छत के नीचे सभी धर्मों की प्रार्थना की जानी चाहिए। सभी धर्म एक ही ईश्वर को पाने के विभिन्न रास्ते हैं तथापि धर्म की मूल शिक्षा व आध्यात्मिक ज्ञान सदैव शाश्वत व एक ही रहता है। इससे पहले, सी.एम.एस. शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत सुमधुर भजनों से विश्व एकता सत्संग का शुभारम्भ हुआ, जिन्होंने बहुत ही सुमधुर भजन सुनाकर सम्पूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर कर दिया।

            विश्व एकता सत्संग में आज सी.एम.एस. राजाजीपुरम (प्रथम कैम्पस) के छात्रों ने शिक्षात्मक आध्यात्मिक कार्यक्रम प्रस्तुंत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्कूल प्रार्थना, प्रार्थना गीत, सद्विचार, नृत्य, लघु नाटिका पर्यावरण पर कार्यक्रम, माताओं का समूह गान आदि कार्यक्रमों को सभी ने खूब सराहा। इस अवसर पर अनेक विद्वजनों ने सारगर्भित विचार व्यक्त किये। सत्संग का समापन संयोजिका श्रीमती वंदना गौड़ द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

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