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‘वसुधैव कुटुम्बकम’की विचारधारा व भारतीय संविधान ही विश्व की समस्याओं का समाधान है- डा. जगदीश गाँधी

‘वसुधैव कुटुम्बकम’की विचारधारा व भारतीय संविधान ही विश्व की समस्याओं का समाधान है- डा. जगदीश गाँधी

‘वसुधैव कुटुम्बकम’की विचारधारा व भारतीय संविधान ही विश्व की समस्याओं का समाधान है- डा. जगदीश गाँधी

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लखनऊ, 12 जनवरी। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ एक ऐसी विचारधारा है, सिर्फ अपने देश ही नहीं अपितु विश्व के सम्पूर्ण देशों की एकता, शान्ति व समृद्धि की कामना करता है। वास्तव में, यही वो विचार है जिसकी दुनिया को आज सवसे अधिक आवश्यकता है क्योंकि इसी विचारधारा में विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान निहित है। यह विचार हैं सिटी मोन्टेसरी स्कूल के संस्थापक एवं प्रख्यात शिक्षाविद्, डा. जगदीश गाँधी के, जो आज यहाँ सी.एम.एस. गोमती नगर आॅडिटारियम में आयोजित एक प्रेस काॅन्फ्रेन्स को सम्बोधित कर रहे थे। यह पत्रकार वार्ता विश्व में बढ़ती अशान्ति व तनाव की परिस्थितियों के संदर्भ में आयोजित की गई थी, जिसके माध्यम से डा. जगदीश गाँधी ने सभी विश्व नागरिकों का जोरदार आह्वान किया कि वे आगे आकर विश्व एकता, विश्व शान्ति एवं ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के विचारों को सारे विश्व में प्रचारित-प्रवाहित करें।

            प्रेस कान्फ्रेन्स में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए डा. गाँधी ने आगे कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की यही विचारधारा हमारे संविधान में भी सन्निहित है और विश्व एकता व विश्व शान्ति ही ही इसका मूल आधार है। हमारा संविधान, खासकर ‘भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51’ वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को अक्षरशः चरितार्थ करता है और आज जरूरत है कि इस भावना को विश्व के कोने-कोने तक प्रचारित-प्रवाहित किया जाये। डा. जगदीश गाँधी ने जोर देते हुए कहा कि विश्व की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए विश्व संसद, विश्व सरकार एवं प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय कानून व्यवस्था का गठन अब अनिवार्य आवश्यकता है और यही विश्व एकता व विश्व शान्ति का एकमात्र विकल्प भी है।

            डा. गाँधी ने आगे कहा कि दुनिया में एकता व शान्ति स्थापना हेतु यह सर्वश्रेष्ठ समय है। अभी नहीं तो कभी नहीं। अपनी बात को स्पष्ट करते हुए डा. गाँधी ने कहा कि विश्व व्यवस्था में आज चारों तरफ अशान्ति व अराजकता का वातावरण है, खासकर, अमेरिका व ईरान के बीच की तनातनी से तृतीय विश्व युद्ध की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में अमेरिका व भारत जैसे विशाल लोकतान्त्रिक देशों के राष्ट्रप्रमुखों का कर्तव्य है कि वे विश्व मानवता के हित में अविलम्ब सभी प्रभुसत्ता सम्पन्न राष्ट्रों की बैठक बुलाकर एक वैश्विक लोकतंत्र (विश्व संसद) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करें।

            डा. गाँधी ने आगे कहा कि सिटी मोन्टेसरी स्कूल विश्व का अकेला ऐसा विद्यालय है जो अपने यहाँ अध्ययनरत लगभग 57000 छात्रों को सर्वोत्कृष्ट शिक्षा प्रदान करने के साथ ही उन्हें उच्च जीवन मूल्य प्रदान कर मानवता की सेवा करने वाला एक आदर्श विश्व नागरिक बनाता है, साथ ही संसार के ढाई अरब बच्चों की शान्ति सुरक्षा के लिए भी सतत् प्रयासरत है। सी.एम.एस. के इन प्रयासों को पूरी दुनिया में सराहा गया है। डा. गाँधी ने कहा कि सी.एम.एस. का मकसद सिर्फ एक है और वह यह वर्तमान एवं भावी पीढ़ी सुरक्षित व सुखमय विश्व व्यवस्था में सांस ले सके और यह कार्य विश्व संसद, विश्व सरकार एवं प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय कानून व्यवस्था से ही संभव है।

            सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने बताया कि भावी पीढ़ी के हित में सी.एम.एस. अपनी स्थापना के समय से ही विश्व एकता व विश्व शान्ति हेतु लगातार प्रयासरत है और सी.एम.एस. के सभी 57000 छात्र, शिक्षक व उनके अभिभावक इस मुहिम को सफल बनाने में जुटे हैं। डा. जगदीश गाँधी के मार्गदर्शन में सी.एम.एस. द्वारा विगत 20 वर्षों से लगातार अन्तर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन का आयोजन लखनऊ में किया जा रहा है, जिसमें अब तक 136 देशों के 1299 मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश तथा शासनाध्यक्ष प्रतिभाग कर चुके हैं तथापि विश्व की न्यायिक बिरादरी ने सी.एम.एस. के विश्व एकता, विश्व शान्ति व विश्व के ढाई अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य की मुहिम को भारी समर्थन दिया है।

 

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