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माताएं ही बच्चों में संस्कार, सामाजिकता एवं नैतिकता का विकास कर सकती हैं - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

माताएं ही बच्चों में संस्कार, सामाजिकता एवं नैतिकता का विकास कर सकती हैं - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

माताएं ही बच्चों में संस्कार, सामाजिकता एवं नैतिकता का विकास कर सकती हैं - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

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लखनऊ, 19 जनवरी। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर आॅडिटोरियम में आयोजित विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं बहाई अनुयायी डा. भारती गाँधी ने कहा कि माताएं ही बच्चों में संस्कार, सामाजिकता एवं नैतिकता का विकास कर सकती हैं। माता बच्चों की प्रथम शिक्षिका है एवं स्कूल शिक्षा का मंदिर है तथा बच्चे देव समान हैं। सी.एम.एस. बच्चों को किताबी ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें आध्यात्मिक तथा मानवीय शिक्षा भी प्रदान करता है जिससे यही बच्चे आगे चलकर विश्व में एकता व शान्ति का परचम लहरायेंगे। सी.एम.एस. के बच्चे ‘जय जगत’ तथा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना के साथ शिक्षित होते हैं तथा बड़े होकर पूरी दुनिया में भाईचारा फैलायेंगे। इससे पहले, विश्व एकता सत्संग का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं सी.एम.एस. के संगीत शिक्षकों द्वारा सुमधुर भजनों से हुआ।

            विश्व एकता सत्संग में आज सी.एम.एस. आर.डी.एस.ओ. कैम्पस के छात्रों ने आध्यात्मिक-साँस्कृतिक कार्यक्रमों की सुन्दर प्रस्तुतियों से उपस्थित सत्संग प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। स्कूल प्रार्थना से कार्यक्रम की शुरूआत करके छात्रों ने अब्दुल कलाम पर लघु नाटिका ‘मिसाइल मैन’ एवं धार्मिक एकता पर आधारित विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किये।  छात्रों द्वारा प्रस्तुत गीत ‘टेल मी व्हाई’ एवं लघु नाटिका ‘द गारबेज डायट’ को भी सभी ने खूब सराहा। इस अवसर पर कई जाने-माने विद्वानों एवं विभिन्न धर्मावलम्बियों ने भी अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किये। अन्त में सत्संग की संयोजिका श्रीमती वंदना गौड़ ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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