ईश्वर हमारे बीच भिन्न-भिन्न रूपों में विराजमान रहता है - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

ईश्वर हमारे बीच भिन्न-भिन्न रूपों में विराजमान रहता है - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

ईश्वर हमारे बीच भिन्न-भिन्न रूपों में विराजमान रहता है - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

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सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर आॅडिटोरियम में आयोजित विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं बहाई अनुयायी डा. भारती गाँधी ने कहा कि ईश्वर हमारे बीच ही विभिन्न रूपों में विराजमान रहते हैं, हमें पता नहीं कि किस रूप में ईश्वर हमें मिल जायें, इसलिए सबसे अच्छा यही है कि सभी से स्नेह व प्यार से, मिलजुलकर रहें। उन्होंने कहा कि हमारी सांसे अनवरत बिना प्रयास के चलती रहती हैं और यही हमारे जीवन का खजाना है। हमें अपनी हर आती-जाती सांस के साथ प्रभु का स्मरण करना चाहिए और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए। डा. गाँधी ने कहा कि ईश्वर के अवतार समय-समय पर आते रहते हैं जिनमें हमें ईश्वर की सत्ता का आभास होता है। इससे पहले, विश्व एकता सत्संग का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन एवं सी.एम.एस. के संगीत शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत सुमधुर भजनों से हुआ।

                विश्व एकता सत्संग में आज विभिन्न धर्मों के अनुयाइयों ने अपने अपने विचार प्रकट किये। श्री वीर विक्रम बहादुर मिश्र ने कहा कि ईश्वर से कुछ भी छुपा कर हम अपने आप को ही भ्रम में रखते हैं, अपने से छल करते हैं ईश्वर से कुछ भी छिपा नहीं होता है। इसी प्रकार कई जाने-माने विद्वानों एवं विभिन्न धर्मावलम्बियों ने भी अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किये। अन्त में सत्संग की संयोजिका श्रीमती वंदना गौड़ ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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