उत्तर प्रदेश

राहुल के संसदीय क्षेत्र अमेठी में मुस्लिमों ने प्रधानमंत्री आवास लेने से किया इंकार

राहुल के संसदीय क्षेत्र अमेठी में मुस्लिमों ने प्रधानमंत्री आवास लेने से किया इंकार

राहुल के संसदीय क्षेत्र अमेठी में मुस्लिमों ने प्रधानमंत्री आवास लेने से किया इंकार

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प्रधानमंत्री आवास योजना को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में झटका लगा है। जिले में जायस कस्बे के सैदाना में करीब 12 मुस्लिम परिवारों ने वित्तीय मदद के एक मुश्त भुगतान की शर्त पर प्रधानमंत्री आवास लेने से मना कर दिया है। 

लाभार्थियों का कहना है कि आवास के निर्माण के लिए मिलने वाली रकम का भुगतान एक मुश्त होने पर ही वे योजना का लाभ लेने को तैयार है। उनका यह भी आरोप है कि शौचालय निर्माण के लिए मिलने वाली सरकारी मदद का उन्हे अब तक एक रूपया भी नहीं दिया गया। 

लाभार्थी मोजिज मेंहदी ने कहा कहा हम आवास लेना चाहते हैं। इसके लिए 50 हजार रुपए मिला है, लेकिन उसको खर्च नहीं कर सकते हैं। अगर उसमें से 10 हजार रुपए भी खर्च कर देंगे तो हमारे बच्चे भूखे मर जाएंगे। हम कल कमरा बनवा दें, बस पूरी किश्त एक साथ मिले। साल भर पहले शौचालय बनवाया लेकिन आज तक उसका भुगतान नही हुआ। 

एक अन्य लाभार्थी खुशनुमा नकवी ने बताया मेरे पास कोई आमदनी नहीं है इसलिए आवास नहीं बना पा रहें हैं। हमारे यहां एक दीवार और एक कमरे की जरूरत है, अगर बन जाएगा तो ठीक है नहीं तो कोई बात नहीं है। हमें कोई उधार पैसे देगा भी नहीं और हम किससे उधार लेंगे। हम उधार से घबराते हैं, कर्जदार घर आकर घेरेंगे तो हम कैसे रुपए ले लें। वह कहती हैं कि पति ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और डीएम को पत्र लिखा है ताकि हमें पैसा एक साथ मिल जाए। 

इस बारे में स्थानीय सभासद पति सैयद सादिक मेंहदी पे कहा कि ये बात तो फार्म में ही दर्ज है। बीस फीसदी की पहली किस्त 50 हजार की मिलेगी, फाउंडेशन तैयार होने के बाद दूसरी किस्त डेढ़ लाख की मिलेगी.और फिर स्लेप के लिए तीसरी किस्त का 50 हजार रूपए दिया जाना तय है। शौचालय निर्माण का आज तक भुगतान न होने के संदर्भ में उन्होंंने कहा कि हां साल भर हो गए हैं भुगतान नही हुआ। इसकी वजह ये है कि लाभार्थी मुस्लिम हैं, और चेयरमैन केवल सोनकर समाज का ही भुगतान करेगें।

इस बार जायस नगर पालिका के चेयरमैन महेश सोनकर ने कहा हमें जानकारी हुई तो हम लाभार्थी के घर गए उन्हें समझाया। लेकिन वो सभी एक मुश्त ढाई लाख रूपए मिलने के बाद ही निर्माण की बात कह रहे। जबकि हम इन लोगों के पास दो बार गए। शौचालय निर्माण में आज तक भुगतान नही होने की बात को उन्होंंने मना कर दिया है। 

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