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अब ऐसे दिखते है ये एक्टर : साल भर से है बीमार

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विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। बंटवारे के बाद उनका परिवार मुंबई में बस गया।
विनोद के पिता टेक्सटाइल बिजनेसमैन थे। लेकिन वे साइंस के स्टूडेंट रहे हैं और पढाई के बाद इंजीनियर बनने का सपना देखा करते थे। हालांकि उनके पिता चाहते थे कि वो कॉमर्स लें और पढ़ाई के बाद घर के बिजनेस से जुड़ें।
स्कूलिंग के बाद पिता ने उनका एडमिशन एक कॉमर्स कॉलेज में भी करा दिया था लेकिन विनोद का पढ़ाई में मन नहीं विनोद के अनुसार कॉलेज लाइफ में उन्होंने थिएटर में काम करना शुरू किया। वहां उनकी कई गर्लफ्रेंड्स थीं। यहीं उनकी मुलाकात गीतांजलि से हुई जो उनकी पहली पत्नी बनीं। विनोद और गीतांजलि के दो बेटे अक्षय और राहुल खन्ना हैं। 

विनोद के मुताबिक एक पार्टी के दौरान उनकी मुलाकात सुनील दत्त से हुई थी। सुनील एक फिल्म के लिए अपने भाई के किरदार के लिए किसी नए एक्टर की तलाश में थे। उन्होंने विनोद खन्ना को वो रोल ऑफर किया।
लेकिन जब ये बात उनके पिता को पता चली तो उन्होंने विनोद पर बंदूक तान दी। क्योंकि उनके पिता विनोद खन्ना को फिल्मो में नहीं भेजना चाहते थे उनका कहना था कि यदि वे फिल्मों में गए तो वो उन्हें गोली मार देंगे।
हालांकि विनोद की मां ने उनके पिता को इसके लिए राजी कर लिया और दो साल का वक्त दिया। पिता ने कहा अगर तुम दो साल तक कुछ ना कर पाए तो फैमिली बिजनेस करना होगा ।

विनोद की पहली फिल्म मन का मीत को दर्शकों का मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला। इसके बाद एक हफ्ते में ही विनोद ने करीब 15 फिल्में साइन कीं।विनोद खन्ना ने अपने करियर में करीब 141 फिल्में की हैं। उन्हें खासतौर से मेरे अपने मेरा गांव मेरा देश इम्तिहान इनकार अमर अकबर एंथोनी लहू के दो रंग दयाबान और जुर्म के लिए जाना जाता है।

एक समय था जब फैमिली को वक्त देने के लिए विनोद संडे काम नहीं करते थे। ऐसा करने वाले वो शशि कपूर के बाद दूसरे एक्टर थे लेकिन ओशो से प्रभावित होकर उन्होंने अपना पारिवारिक जीवन तबाह कर लिया था। विनोद अक्सर पुणे में ओशो के आश्रम जाते थे। यहां तक कि उन्होंने अपने कई शूटिंग शेड्यूल भी पुणे में ही रखवाए।दिसंबर 1975 में विनोद ने जब फिल्मों से संन्यास का फैसला लिया तो सभी चौंक गए थे। बाद में विनोद अमेरिका चले गए और ओशो के साथ करीब 5 साल गुजारे। वो वहां उनके माली थे।

4-5 साल तक परिवार से दूर रहने वाले विनोद का परिवार पूरी तरह टूट गया था। जब वो इंडिया लौटे तो पत्नी उन्हें तलाक देने का फैसला कर चुकी थीं। फैमिली बिखरने के बाद 1987 में विनोद ने फिल्म इंसाफ से फिर से बॉलीवुड में एंट्री की।

दोबारा फिल्मी करियर शुरू करने के बाद विनोद ने 1990 में कविता से शादी की। दोनों का एक बेटा साक्षी और एक बेटी श्रद्धा खन्ना है।

1997 में बीजेपी के मेंबर बनने के बाद विनोद नेता भी बन गए। वे गुरदासपुर पंजाब से भाजपा के सांसद हैं। राजनीति के साथ विनोद खन्ना फिल्मों में भी एक्टिव रहे। सलमान खान स्टारर दबंग सीरीज की फिल्मों में अहम किरदार निभा चुके विनोद को आखिरी बार डायरेक्टर रोहित शेट्टी की फिल्म दिलवाले में देखा गया था। इस फिल्म में शाहरुख खान काजोल वरुण धवन और कृति सेनन अहम भूमिका में थे।




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