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PM मोदी ने "स्टैच्यू ऑफ यूनिटी" का किया उद्घाटन, जानें सरदार पटेल की प्रतिमा की बड़ी खासियत

PM मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का किया उद्घाटन, जानें सरदार पटेल की प्रतिमा की बड़ी खासियत

PM मोदी ने "स्टैच्यू ऑफ यूनिटी" का किया उद्घाटन, जानें सरदार पटेल की प्रतिमा की बड़ी खासियत

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देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (31 अक्टूबर) भारत वर्ष के पहले गृहमंत्री और लौहपुरुष सरदार पटेल की प्रतिमा "स्टेच्यू ऑफ यूनिटी" देश को समर्पित किए। दुनिया की सबसे उंची यह प्रतिमा गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार सरोवर बांध पर बनी है। 182 मीटर उंची पटेल की प्रतिमा को तैयार होने में पांच साल का वक्त लगा है।

 इस प्रतिमा के बनने से पहले चीन में स्थित स्प्रिंग टेंपल की 153 मीटर ऊंची बुद्ध प्रतिमा अब तक की सबसे ऊंची मूर्ति होने का रिकॉर्ड था। // लेकिन सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा बनने के बाद अब यह रिकॉर्ड भारत के नाम हो गया है जी हां यह प्रतिमा दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमा है।

इस मूर्ति को बनाने वाली कंपनी ने खुद इस बात को माना है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है और इस प्रतिमा को महज 33 माह में तैयार किया गया है।

लेकिन इस बात को जानकर हैरानी होगी कि चीन में स्थित स्प्रिंग टेंपल की 153 मीटर ऊंची बुद्ध प्रतिमा के निर्माण में करीबन 11 साल का वक्त लगा था। "स्टैच्यू ऑफ यूनिटी" विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा होने के साथ साथ न्यूयॉर्क में स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊंची है।

सरदार पटेल की इस मूर्ति का कुल वजन 1700 टन है और ऊंचाई 522 फिट यानि 182 मीटर है। इस मूर्ति के पैर की ऊंचाई 80 फिट, हाथों की ऊंचाई 70 फिट, कंधों की ऊंचाई 140 फिट और चेहरे की ऊंचाई 70 फिट है।

सरदार पटेल की इस मूर्ति को बनाने में करीब 2,989 करोड़ रुपये का खर्च आया है। सरदार पटेल की मूर्ति को बनाने में 1,347 करोड़ रुपये खर्च हुए, इसके बाद 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र पर खर्च हुए। इसके अलावा 657 करोड़ रूपए निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 15 साल तक ढांचे के रखरखाव पर खर्च किए किए जाएंगे और 83 करोड़ रुपये पुल बनाने पर खर्च हुए हैं।

Statue Of Unity की खासियत:-

गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति (182 मीटर ऊंची) बनाकर तैयार की गई है।

गुजरात के केवड़िया में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध से महज 3.32 किलोमीटर की दूरी पर इस विशालकाय प्रतिमा को स्थापित किया गया है।

इस मूर्ति का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 31 अक्टूबर को अनावरण किया।

 सरदार की इस प्रतिमा के साथ ही श्रेष्ठ भारत भवन भी तैयार किए गए है, इस भवन में 50 से ज्यादा कमरे तैयार किए गए है I इस जगह आने वाले पर्यटकों के लिए वैली भी तैयार की गई है। सुरक्षा, सफाई के साथ ही पटेल की प्रतिमा के पास फूड कोर्ट भी बनाया गया है।

बता दें कि स्टैच्यू के अंदर दो लिफ्ट रखी गई है,यह लिफ्ट स्टैच्यू में ऊपर तक ले जाएगी,जहां सरदार पटेल के दिल के पास एक गैलरी बनायी गई है।

यहां से पर्यटकों को सरदार पटेल बांध और वैली का नजारा देखने को मिलेगा।

इस प्रतिमा को बनाने के लिए लगे मटेरियल:-

-18500 Metric Ton Steel.

-70000 Metric Ton Cement.

-2000 Metric Ton Copper.

 का इस्तेमाल किया गया है। इस प्रतिमा की सबसे बड़ी खासियत ये भी है कि ये इतनी विशाल है कि सिर्फ सर की ऊंचाई इतनी है जितनी 7 मंजिला इमारत की होती है।

182 मीटर वाली इस प्रतिमा की ज़मीन से ऊंचाई मापी जाए तो 240 मीटर होगी ।

इस मूर्ति के निर्माण के लिए केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद अक्टूबर 2014 में लार्सेन एंड टर्बो कंपनी को ठेका दिया गया। इस काम को तय समय में अंजाम तक पहुंचाने के लिए 4076 मजदूरों ने दो शिफ्टों में काम किया।

 इस मूर्ति से पटेल की वो सादगी भी झलकती है, सिलवटों वाला धोती-कुर्ता, बंडी और कंधे पर चादर उनकी पहचान थी,ये सब कुछ मूर्ति में ढल चुका है। सरदार पटेल की शख्सियत में वो दम था कि उनको सम्मान से लौह पुरुष कहा जाता था, इसीलिए PM मोदी ने देश के कोने कोने से लोहा मांगा था ताकि वो लोहा पटेल के सपनों को फौलादी बना दे। इस स्मारक की आधारशीला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्य मंत्री रहते हुए 31 अक्तूबर, 2013 को पटेल की 138 वीं वर्षगांठ के मौके पर रखी थी।

गुजरात के सीएम रहते नरेंद्र मोदी की ख्वाहिश थी कि वल्लभ भाई पटेल की एक ऐसी प्रतिमा बनें जो कि विश्व में सबसे ऊंची हो । और आज पीएम नरेंद्र मोदी का ये सबसे बड़ा सपना अब पूरा हो गया है।

"सोचिये जब दुनिया भर के पर्यटक दुनिया की सबसे ऊँची और विशाल प्रतिमा Statue Of Unity देखने भारत आयेंगे तो स्थानीय लोगों के लिए कितना बड़ा फायदा होगा,आपको क्या लगता है दोस्तों कमेंट में अपनी राय ज़रूर दें ।

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