उत्तर प्रदेश

आज रिहा होंगे तलवार दंपत्ति, जारी रखेंगे जेल में रोगियों की सेवा

 आज रिहा होंगे तलवार दंपत्ति, जारी रखेंगे जेल में रोगियों की सेवा

आज रिहा होंगे तलवार दंपत्ति, जारी रखेंगे जेल में रोगियों की सेवा

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गाजियाबाद : आरूषि हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आज का दिन तलवार दंपत्ति के जीवन में नया सूरज लेकर आएगा। आज तलवार दंपत्ति डासना जेल से रिहा हो जाएंगे। तलवार दंपति के वकील आज हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी सीबीआई कोर्ट में जमा कराएंगे। कॉपी जमाने कराने के बाद सीबीआई कोर्ट तलवार दंपत्ति की रिहाई के आदेश जारी करेगी। इसके बाद इस रिलीज ऑर्डर को डासना जेल भेजा जाएगा और तलवार दंपत्ति की रिहाई होगी।

आपको बता दे कि तलवार दंपत्ति को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर यानी पिछले सप्ताह गुरुवार को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में तलवार दंपत्ति को बरी करने के आदेश जारी कर दिए थे लेकिन इसके बावजूद उनकी जेल से रिहाई नहीं हो पाई। दरअसल शुक्रवार को तलवार दंपत्ति के वकील को सीबीआई कोर्ट से रिहाई के आदेश नहीं मिल पाए थे। इसके बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी के कारण तलवार दंपत्ति की रिहाई नहीं हो पाई लेकिन आज सोमवार को उनकी जेल से रिहाई हो जाएगी।

आपको बता दे कि तलवार दंपत्ति अपनी बेटी आरूषि और नौकर हेमराज की हत्या के आरोप में नवंबर 2013 से डासना जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। तलवार दंपत्ति को सीबीआई कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी करने के आदेश दिए।

तलवार दंपति ने तय किया है कि वो जेल में बंद होने की कगार पर पहुंच चुके डेंटल विभाग को चालू रखेंगे। इसके लिए राजेश और नूपुर तलवार हर 15 दिन में एक बार मरीजों को देखने डासना जेल आएंगे। राजेश के भाई डॉक्टर दिनेश भी हर 15 दिन में अपनी टीम के साथ डासना जेल जाएंगे और मरीजों का इलाज करेंगे। डॉक्टर दिनेश आंख रोग के एक्सपर्ट हैं।

दान किए जेल में कमाएं पैसे:
राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने जेल मेें कमाए अपने रुपयों को कैदियों के कल्याण के लिए जेल प्रशासन को दान में दे दिए। ज्ञातव्य है कि तलवार दंपत्ति ने जेल में 1417 दिनों में 99 हजार रुपये कमाए गए। जेल में रहने के दौरान राजेश तलवार ने मुरादनगर के आईटीएस हॉस्पिटल के सहयोग से तैयार कराए डेंटल क्लिनिक में पूरा समय दिया।

इस दौरान उन्होंने जेल अफसरों और बंदियों के दांतों का इलाज किया, जबकि नूपुर ने अपना समय बच्चों और अनपढ महिलाओं को शिक्षित करने में बिताया। उन्हें जेल में 40 रुपए रोजाना मिलते थे। दोनों ने 49,500-49,500 रुपये कमाए। इन रुपयों को उन्होंने नहीं लिया और अब उन रुपयों को कैदियों के कल्याण के लिए जेल प्रशासन को दान कर दिए। हांलांकि वे दोनों महीने में दो बार कैदियों की जांच करने आते रहेंगे।

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