जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले को लेकर भाजपा की महिला सांसदों ने कांग्रेस पर हमला बोला है। भाजपा महिला सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले में ज्ञापन सौंपते हुए इसे लोकसभा की आचार समिति (एथिक्स कमेटी) के पास भेजने का अनुरोध किया। भाजपा सांसदों ने कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे इस मुद्दे पर कोई बयान क्यों नहीं दे रहे हैं।
दग्गुबाती पुरंदेश्वरी ने की आचार समिति के पास मामला भेजने की मांग
भाजपा सांसद दग्गुबाती पुरंदेश्वरी ने दावा किया कि जेएनयू की आंतरिक समिति ने कांग्रेस सांसद के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही पाया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि मामले को आचार समिति के पास भेजा जाए। साथ ही, संबंधित सांसद की लोकसभा सदस्यता को लेकर भी विचार किया जाए।
दग्गुबाती पुरंदेश्वरी ने कहा, “हमने लोकसभा अध्यक्ष से कहा है कि कांग्रेस के लोकसभा सांसद बिमोल अकोइजम को आंतरिक समिति ने दोषी पाया है. इसलिए हमने स्पीकर से अनुरोध किया है कि इस मामले को आचार समिति के पास भेजा जाए और इस पर ध्यान दिया जाए. इस बात पर भी विचार किया जाए कि उन्हें लोकसभा सदस्य बने रहना चाहिए या नहीं.”
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण सदन में महिलाओं के प्रति इस तरह के व्यवहार के आरोपी व्यक्ति का बैठना उचित नहीं है। पुरंदेश्वरी के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि वह मामले को देखेंगे, सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करेंगे और यह भी तय करेंगे कि इसे आचार समिति के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं।
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खरगे से पूछे सवाल
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मामले को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने नवरात्र के दौरान कन्या पूजन के महत्व का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद ने 11 छात्राओं का शोषण किया और शिकायत मिलने के बाद जांच समिति ने आरोपों को सही पाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जेएनयू ने संबंधित व्यक्ति को बर्खास्त कर दिया।
बांसुरी स्वराज ने सवाल उठाया कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे इस मामले पर चुप क्यों हैं और अब तक कोई बयान क्यों नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता महिलाओं के अधिकारों और पितृसत्ता के खिलाफ आवाज उठाने की बात करते हैं, लेकिन इस मामले में उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उन्होंने बताया कि भाजपा महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और इस मुद्दे पर उनके साथ सार्थक चर्चा हुई।
प्रियंका गांधी के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ नारे का भी किया जिक्र
दग्गुबाती पुरंदेश्वरी ने प्रियंका गांधी के नारे ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का जिक्र करते हुए कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक साक्षात्कार देखा, जिसमें उनके मुताबिक कांग्रेस सांसद ने शिकायतों की संख्या 11 के बजाय 15 बताई थी।
पुरंदेश्वरी ने इस बयान को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे संबंधित व्यक्ति की सोच पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने पूछा कि प्रियंका गांधी महिलाओं के लिए लड़ने की बात किस संदर्भ में करती हैं और इस मामले में कांग्रेस ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की।
रूप कुमारी चौधरी बोलीं- शिकायत करने वाली छात्राओं की सुरक्षा जरूरी
भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष और सांसद रूप कुमारी चौधरी ने जेएनयू से जुड़े इस मामले को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा को कलंकित करती है।
रूप कुमारी चौधरी ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने शिकायत करने वाली 11 छात्राओं के पक्ष में एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को शिकायत करने वाली छात्राओं की सुरक्षा की चिंता है।
चौधरी के मुताबिक, इस मुद्दे को लेकर देशभर में प्रदर्शन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा आने वाले दिनों में भी शिकायत करने वाली छात्राओं के साथ खड़ी रहेगी और उनकी लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे व्यक्ति को संसद में बैठने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
भाजपा ने दोहराई कार्रवाई की मांग, कांग्रेस से मांगा जवाब
भाजपा महिला सांसदों ने मांग की कि मामले में शिकायत करने वाली छात्राओं को न्याय और सुरक्षा मिलनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि आरोपों और जांच से जुड़े पहलुओं पर विचार करते हुए उचित कार्रवाई की जाए।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से भी इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। फिलहाल, प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांग है कि मामले को लोकसभा की आचार समिति के पास भेजने सहित सभी कानूनी और संसदीय पहलुओं पर विचार किया जाए।









