भारत में आयोजित BRICS India Summit 2026 की सफलता को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने इस समिट की सफलता को देखा है. जयशंकर के मुताबिक, बेहद बंटी हुई दुनिया और कई बड़े संघर्षों के बीच भारत ने अलग-अलग देशों को एक मंच पर लाकर आम सहमति बनाने में सफलता हासिल की.
32 प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी, जयशंकर ने बताया भारत की ताकत
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि BRICS India Summit 2026 में कुल 32 प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए. इनमें 11 सदस्य देश, 10 पार्टनर देश, 4 रिजनल ऑर्गेनाइजेशन और 7 इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन शामिल थे. उन्होंने कहा कि ज्यादातर प्रतिनिधिमंडलों का प्रतिनिधित्व राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख स्तर पर किया गया.
जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की तारीफ करते हुए कहा, ‘सबसे पहली और अहम बात मोदी के भारत की मजबूत ‘कन्वेनिंग पावर’ है, क्योंकि इनमें से ज्यादातर का प्रतिनिधित्व राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख स्तर पर किया गया था. यह समझना जरूरी है कि यह BRICS समिट एक ऐसी दुनिया में हो रही थी जो बहुत बंटी हुई है, जहां दो बड़े संघर्ष चल रहे हैं. गहरी दूरियां हैं. लोगों की राय और हित बहुत अलग-अलग और मजबूत हैं. और हमने क्या किया?’
ऐसे माहौल में भी बनी आम सहमति
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया में मौजूद मतभेदों के बावजूद भारत आम सहमति बनाने में कामयाब रहा. उन्होंने कहा, ‘इस बंटवारे के माहौल के बावजूद, हमने एक आम सहमति बनाई कि हम उस मुद्दे पर बात करेंगे जो उस समय का सबसे मुश्किल मुद्दा था. वेस्ट एशिया या मिडिल ईस्ट का संघर्ष। हम एक ऐसा बयान जारी करने में सफल रहे जिस पर सभी सहमत थे. एक ऐसा बयान जिसमें शांति, सुरक्षा, स्थिरता, लंबे समय की समझ, ग्लोबल ट्रेड (वैश्विक व्यापार) के सुचारू प्रवाह, सप्लाई चेन, ऊर्जा और नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा का आग्रह किया गया था.’
जयशंकर ने कहा कि समिट की उपलब्धि केवल किसी एक मुद्दे पर सहमति बनने तक सीमित नहीं रही. उनके मुताबिक, पूरे सम्मेलन का माहौल ऐसा रहा कि नेताओं के बीच बातचीत काफी खुली और सहज तरीके से हुई. उन्होंने बताया कि ऐसे नेता भी इस दौरान मिले, जो सामान्य परिस्थितियों में शायद एक-दूसरे से मुलाकात नहीं कर पाते.
उन्होंने बताया, ‘अब, बात सिर्फ इतनी नहीं थी कि हम बंटी हुई दुनिया में आपसी समझ बनाने में कामयाब रहे. असल में, समिट का पूरा माहौल, उसका मिजाज और भावना ऐसी थी कि बातचीत बहुत खुली और सहज रही. ऐसे नेता भी मिले जो शायद दूसरे हालात में नहीं मिलते, लेकिन इस समिट के दौरान वे मिले. इसका नतीजा यह हुआ कि आज हमने अहम मुद्दों पर ग्लोबल बातचीत में बड़ा योगदान दिया.’
आतंकवाद पर BRICS का रुख भी किया साफ
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने BRICS Summit के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर बनी सहमति को भी अहम बताया. उन्होंने कहा, ‘मैं एक और बात कहना चाहता हूं, जिस पर बनी सहमति बहुत अहम थी. वह मुद्दा था आतंकवाद. ब्रिक्स का रुख बिल्कुल साफ था कि आतंकवाद का कोई भी काम आपराधिक है, और असल में, उसने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले को पूरी तरह से अस्वीकार्य माना. उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की निंदा की, जिसमें सीमा-पार आतंकवाद भी शामिल है. आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस पर जोर दिया और इससे निपटने में दोहरे मापदंडों को खारिज किया. तो कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि यह समिट ऐसी थी जहां प्रधानमंत्री के बातचीत, कूटनीति और विकास के संदेश की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दी.’
जयशंकर ने कहा कि BRICS के लिए दुनियाभर से नेताओं का भारत आना इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को वैश्विक स्तर पर किस तरह की प्रतिक्रिया मिली. उन्होंने कहा, ‘उस संदेश पर कैसी प्रतिक्रिया मिली, यह हमने तब देखा जब दुनिया भर के नेता ब्रिक्स के लिए आए. तो मैं अपनी बात यहीं खत्म करता हूं. बहुत से लोगों ने कहा था कि ऐसा नहीं होगा. लेकिन ऐसा हुआ. यह नई दिल्ली में हुआ और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ.’








