सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस हिरासत के दौरान दर्ज किया गया कथित कबूलनामा अकेले किसी व्यक्ति को NSA के तहत हिरासत में रखने का आधार नहीं बन सकता। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च भी लगाया।
मुल्ला अफरोज संभल के रहने वाले कारोबारी और प्रॉपर्टी डीलर हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल रिकॉर्ड में उनके वकील ने उन्हें संभल जिले का प्रतिष्ठित कारोबारी, प्रॉपर्टी डीलर और इनकम टैक्स देने वाला व्यक्ति बताया था।
24 नवंबर 2024 की हिंसा में सामने आया था नाम
मुल्ला अफरोज का नाम 24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा की जांच के दौरान सामने आया था। उस दिन शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर हिंसा भड़क गई थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी और अन्य लोग घायल हुए थे।
पुलिस ने आरोप लगाया था कि अफरोज हिंसा की साजिश से जुड़े लोगों में शामिल थे। हालांकि, ये पुलिस के आरोप हैं और इन्हें अदालत में अंतिम रूप से साबित किया जाना बाकी है।
शारिक साठा से कनेक्शन का पुलिस ने लगाया आरोप
जांच के दौरान पुलिस ने मुल्ला अफरोज को दुबई में रहने वाले शारिक साठा के स्थानीय नेटवर्क से जुड़ा बताया था। पुलिस के मुताबिक, अफरोज उसके लिए काम करता था और दोनों के बीच संपर्क था। कुछ रिपोर्टों में पुलिस ने अफरोज को साठा का स्थानीय गुर्गा भी बताया था।
पुलिस का दावा था कि पूछताछ के दौरान अफरोज ने संभल हिंसा के पीछे शारिक साठा का नाम लिया था। इसी कथित कबूलनामे को लेकर भी मामला सामने आया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस हिरासत में दिया गया कथित कबूलनामा अकेले NSA के तहत हिरासत का आधार नहीं बन सकता।
जनवरी 2025 में हुई थी गिरफ्तारी, बाद में लगा NSA
पुलिस ने मुल्ला अफरोज को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया था। हाई कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, संभल हिंसा के करीब 55 दिन बाद पुलिस ने उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया था। अफरोज का कहना था कि उनके खिलाफ सीधे तौर पर कोई सबूत नहीं था और पुलिस ने हिरासत के दौरान उनसे कथित कबूलनामा लिया था।
बाद में अफरोज को नियमित जमानत मिल गई थी। हालांकि, 13 अक्टूबर 2025 को संभल के जिलाधिकारी ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत का आदेश जारी कर दिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस कार्रवाई को बरकरार रखा था, जिसके बाद मुल्ला अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
अब सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत उनकी हिरासत को रद्द कर दिया है और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च लगाया है।









