उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की स्नातक सीटों के लिए मतदान के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग को लेकर अहम बयान दिया है। कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि 170 सीटों के बारे में उन्हें और कांग्रेस को जानकारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हराना है और इसके लिए दोनों दलों को रास्ता निकालना होगा।
कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग पर क्या बोले अखिलेश यादव?
स्नातक एमएलसी चुनाव के लिए ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) कार्यालय में वोट डालने के बाद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उनसे कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर सवाल किया गया।
जवाब में सपा अध्यक्ष ने कहा कि 170 सीटों के बारे में उन्हें और कांग्रेस को पता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को हराना उनका लक्ष्य है और इसके लिए रास्ता निकालना जरूरी है। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के बीच सीट शेयरिंग की चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है।
MLC चुनाव में मतदान को लेकर मतदाताओं से की अपील
अखिलेश यादव ने स्नातक एमएलसी चुनाव का जिक्र करते हुए मतदाताओं से अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाताओं का वोट लोकतंत्र को बचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार निष्पक्ष चुनाव कराने का दावा करती रही है, लेकिन कई जगहों से मतदान में बाधा डालने की शिकायतें सामने आई हैं। उनके मुताबिक, कई जिलों से ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि सपा समर्थकों को वोट डालने से रोकने के लिए बीजेपी के लोगों या भ्रष्ट अधिकारियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये आरोप अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान लगाए।
‘शिक्षक के चुनाव में ऐसा व्यवहार, आम चुनाव में भी करेंगे?’
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर मतदाताओं को मतदान करने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव है और इस तरह का व्यवहार आम चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि आम जनता बीजेपी के खिलाफ है और लोग अपने मताधिकार के जरिए उसे सत्ता से हटाने का काम करेंगे। हालांकि, मतदान में बाधा डालने से जुड़े उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इन बयानों के आधार पर नहीं होती है।
BJP को हराने पर जोर, विपक्षी रणनीति पर नजर
अखिलेश यादव के बयान में दो प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं। पहला, कांग्रेस के साथ 170 सीटों को लेकर बातचीत और दूसरा, उत्तर प्रदेश में बीजेपी को हराने के लिए विपक्षी रणनीति तैयार करना। वहीं, एमएलसी चुनाव को लेकर उनके आरोपों ने निष्पक्ष मतदान और मतदाताओं की भागीदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं।









