कल्पना कीजिए कि अस्पताल जैसी कई जरूरी स्वास्थ्य जांच के लिए बड़ी बिल्डिंग या भारी-भरकम मशीनों वाली लैब की जरूरत न पड़े। एक पोर्टेबल मशीन को कार में रखकर शहर से गांव या किसी दूर-दराज इलाके तक ले जाया जाए और मरीज के सामने आते ही वहीं ब्लड प्रेशर, शुगर, ECG, फेफड़ों के साथ आंख, नाक और कान की जांच शुरू हो जाए। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में प्रदर्शित ‘Doctor on Duty’ इसी तरह के मॉडल को जमीन पर उतारने की कोशिश कर रहा है।
करीब तीन लाख रुपये की कीमत वाली यह मशीन एक बूंद खून से कई जरूरी जांच करने में सक्षम बताई गई है। इसके जरिए करीब 10 मिनट में कुल 75 तरह के टेस्ट किए जा सकते हैं। इसके अलावा इसे AI आधारित हेल्थ सिस्टम के तौर पर विकसित किया गया है, जिससे भविष्य में होने वाले कुछ स्वास्थ्य जोखिमों के शुरुआती संकेतों की पहचान में भी मदद मिल सकती है। सीएम योगी की प्रेरणा से यूपी के युवाओं ने भविष्य में होने वाली बीमारियों से बचाव की दिशा में काम करने वाली इस मशीन को विकसित किया है।
₹3 लाख की मशीन में अस्पताल जैसी कई जांच
एमडी इंटरनल मेडिसिन और Doctors on Duty के फाउंडर एवं CEO डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के मुताबिक, मशीन को इस तरह तैयार किया गया है कि प्राथमिक स्तर पर जरूरी कई स्वास्थ्य जांच एक ही स्थान पर की जा सकें। इसमें ब्लड प्रेशर, शुगर, बॉडी एनालिसिस, ECG और लंग्स फंक्शन टेस्ट के साथ आंख, नाक और कान की जांच की सुविधा भी शामिल है।
डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के अनुसार, सिंगल ड्रॉप ब्लड टेस्ट सहित कुल 75 जांच करीब 10 मिनट में की जा सकती हैं। मशीन की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसका पोर्टेबल होना शामिल है। इसे कार में रखकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। ऐसे में जिन गांवों या इलाकों में अस्पताल या डायग्नोस्टिक सेंटर उपलब्ध नहीं हैं, वहां जांच की सुविधा पहुंचाने के लिए पूरी लैब स्थापित करने की जरूरत कम हो सकती है।
मशीन को बिजली के अलावा बैटरी और सोलर पावर से भी चलाया जा सकता है। इससे दूरदराज क्षेत्रों में भी इसके इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
महंगी जांच और अस्पताल तक आने-जाने का खर्च हो सकता है कम
इस मॉडल के जरिए कई प्राथमिक जांच अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर की तुलना में कम लागत पर उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। कई मामलों में जांच का खर्च मौजूदा लागत के करीब 10 प्रतिशत तक सीमित किए जाने की संभावना बताई गई है।
यदि बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल सफल रहता है तो गांवों और छोटे शहरों के मरीजों को सामान्य जांच के लिए बार-बार बड़े अस्पतालों तक जाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे जांच पर होने वाले खर्च के साथ अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाला पैसा और समय भी बच सकता है। साथ ही मरीजों को जांच के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
बीमारी गंभीर होने से पहले स्वास्थ्य जोखिम की पहचान
‘Doctor on Duty’ को सिर्फ एक जांच मशीन के तौर पर नहीं, बल्कि AI आधारित हेल्थ सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। उपलब्ध स्वास्थ्य संकेतकों और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह मरीज में भविष्य में विकसित हो सकने वाले कुछ स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान में सहायता कर सकता है।
इसका उद्देश्य डॉक्टर को शुरुआती स्तर पर मरीज से जुड़ा अधिक स्वास्थ्य डेटा उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर समय रहते आगे की चिकित्सकीय सलाह तक पहुंचाने में मदद करना है। इसके पीछे मूल विचार यह है कि बीमारी गंभीर होने के बाद महंगे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने के बजाय स्वास्थ्य जोखिमों की पहचान पहले ही की जा सके।
खासकर ग्रामीण इलाकों में नियमित स्क्रीनिंग आसान होने से उन लोगों तक भी प्राथमिक स्वास्थ्य जांच पहुंचाई जा सकती है, जो दूरी या खर्च के कारण सामान्य जांच को टालते रहते हैं।
बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम करने की कोशिश
ग्रेटर इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के CEO डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य लोगों की गाढ़ी कमाई के साथ उनका समय बचाना भी है। यदि प्राथमिक जांच स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो जाए तो हर मरीज को शुरुआती टेस्ट के लिए बड़े अस्पताल जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
इस मॉडल के जरिए सामान्य जांच और शुरुआती स्क्रीनिंग स्थानीय स्तर पर किए जाने के बाद जरूरत वाले मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर या बड़े अस्पताल तक रेफर करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे बड़े और केंद्रीय अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम करने में मदद मिलने की संभावना है।
मेडिकल इनोवेशन के साथ रोजगार का भी मॉडल
‘Doctor on Duty’ को सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र की तकनीकी पहल तक सीमित नहीं रखा गया है। करीब तीन लाख रुपये की कीमत और पोर्टेबल डिजाइन के कारण इसे मेडिकल क्षेत्र में स्वरोजगार के मॉडल के रूप में भी विकसित करने की योजना है। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी या उद्यमी मशीन की मदद से स्थानीय स्तर पर हेल्थ स्क्रीनिंग और जांच सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं।
इस स्टार्टअप को ‘Start in UP’ के तहत उत्तर प्रदेश सरकार से 10 लाख रुपये की मदद भी मिली है। इंटरनेशनल ट्रेड शो में इसका प्रदर्शन यह दिखाता है कि प्रदेश के स्टार्टअप स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी लागत, पहुंच और उपलब्धता जैसी बुनियादी चुनौतियों के समाधान पर भी काम कर रहे हैं।
गांवों में बदल सकती है प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की तस्वीर
भारत जैसे बड़े देश में अस्पतालों और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच के साथ डायग्नोस्टिक सुविधाओं की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में कार में आसानी से ले जाई जा सकने वाली, बिजली-बैटरी-सोलर तीनों माध्यमों से संचालित होने वाली और एक ही प्लेटफॉर्म पर दर्जनों जांच उपलब्ध कराने वाली मशीन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक नया मॉडल पेश करती है।
अगर इस तकनीक का बड़े स्तर पर सफल और व्यावहारिक इस्तेमाल होता है, तो सामान्य जांच और शुरुआती स्क्रीनिंग को अस्पताल की चारदीवारी से बाहर स्थानीय स्तर तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।









