कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन के नए प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावों को अंतिम रूप देने और संसद में विचार के लिए पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए। खरगे ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि सभी दलों और अन्य हितधारकों को अपने विचार रखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में कहा कि सरकार को दूरगामी प्रभाव वाले संविधान संशोधन विधेयक को एक बार फिर संसद से जल्दबाजी में या जबरन पारित कराने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, इस तरह के महत्वपूर्ण मुद्दे पर आगे बढ़ने से पहले व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना जरूरी है।
मानसून सत्र के बाद भी संसद का सत्रावसान नहीं होने पर उठाए सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संसद के मानसून सत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक संसद के दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं किया गया है।
खरगे ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले 11 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन से संबंधित किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पेश करने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। हालांकि, उनके अनुसार, सरकार ने इस मांग पर बैठक नहीं बुलाई। इसके बाद 14 अप्रैल की देर शाम विधेयकों को सार्वजनिक किया गया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया।
लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाने का किया दावा
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को 17 अप्रैल को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का समर्थन नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में ‘निर्णायक अंतर’ से हार का सामना करना पड़ा।
खरगे के मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद उन्होंने 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग दोहराई थी। अब चौथी बार उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया जाए।
‘सभी राजनीतिक दलों को विचार-विमर्श के लिए पर्याप्त समय मिले’
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में लिखा, ‘सभी राजनीतिक दलों को अपने स्तर पर, एक-दूसरे के साथ और अन्य सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए.’
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि पिछली बार परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को संसद से पारित कराने में जल्दबाजी की गई थी। खरगे ने कहा कि सरकार को दोबारा ऐसा प्रयास नहीं करना चाहिए। उनके अनुसार, पिछली कोशिश संसद में सफल नहीं हो सकी थी, इसलिए इस बार सरकार को सभी पक्षों से चर्चा करके व्यापक राजनीतिक सहमति बनानी चाहिए।
परिसीमन के मुद्दे पर कांग्रेस की यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब पार्टी सरकार से नए प्रस्तावों को सार्वजनिक रूप से साझा करने और सभी दलों को उन पर चर्चा का अवसर देने की अपील कर रही है।








