illegal Conversion Case: अवैध धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को लेकर एटीएस की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एटीएस के मुताबिक, धर्मांतरण का नेटवर्क नेपाल और दुबई तक फैला हुआ था, जिसकी कमान नीतू संभालती थी, और वहां से आने वाली विदेशी फंडिंग का प्रबंधन भी वही करती थी।
क्या बोले आरोपी जलालुद्दीन?
- उसने अवैध धर्मांतरण से इनकार किया और कहा:
"किसी को मजबूर नहीं किया गया, सबने अपनी मर्जी से इस्लाम अपनाया।"
- उसने उर्स और दरगाह की बात कही:
"हर साल उर्स में सभी धर्मों के लोग आते थे, सबकुछ पारदर्शी था।"
- फंडिंग के बारे में पूछने पर गोलमोल जवाब दिया।
नीतू उर्फ नसरीन का क्या रोल था?
- दुबई और नेपाल से नेटवर्क चलाने की 'मैनेजर' की भूमिका में थी।
- विदेशी फंडिंग और संस्थाओं से संपर्क उसी के जरिए होता था।
- जब रकम खर्च को लेकर सवाल किया गया तो उसने कहा:
"सब छांगुर बाबा तय करते थे कि पैसा कहां खर्च होगा।"
बैंक खातों को लेकर विरोधाभासी बयान
- जलालुद्दीन ने कहा – "मुझे केवल अपने खाते के बारे में पता है।"
- नीतू ने बताया – "मेरे नाम पर 8 बैंक खाते हैं, जिनमें से 3 अलग-अलग संस्थाओं के नाम पर हैं।"
- उसने दावा किया कि सभी अकाउंट्स का नियंत्रण जलालुद्दीन के पास था।
अब आगे क्या?
- ATS टीम आरोपियों को पूछताछ के लिए आजमगढ़ और श्रावस्ती भी ले जा सकती है।
- विदेशी फंडिंग, संस्थाओं के लिंक, और खातों की जांच के लिए ATS जांच को तेज कर रही है।
बड़ी बात यह है:
यह मामला अब सिर्फ धार्मिक रूपांतरण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें विदेशी फंडिंग, संगठित नेटवर्क और आर्थिक अपराध का भी शक गहराता जा रहा है।
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