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सर्वे से हुआ खुलासा, मुस्लिमों में ट्रिपल तलाक को जायज ठहराया

सर्वे से हुआ खुलासा, मुस्लिमों में ट्रिपल तलाक को जायज ठहराया

सर्वे से हुआ खुलासा, मुस्लिमों में ट्रिपल तलाक को जायज ठहराया

देशभर में मुस्लिम महिलाएं ट्रिपल तलाक को लेकर लगातार विरोध की आवाज बुलंद कर रही हैं, लेकिन सर्वे में आया कि मुस्लिमों में एक फीसदी से कम आबादी में ही ट्रिपल तलाक दिया गया हैं, ये सर्वे देश के जाने माने अर्थशास्त्री, स्कॉलर और सच्चर कमेटी के सचिव रह चुके डॉ अबू सालिह शरीफ की निगरानी में कराया गया है, रिसर्च में तलाक और तीन तलाक पर कई अहम जानकारियां निकल कर सामने आई हैं | ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्रिपल तलाक को जायज ठहराया है |

दिल्ली की संस्था सेन्टर फ़ॉर रिसर्च एंड डायबिटीज इन डेवलपमेंट पालिसी ने ये ऑनलाइन सर्वे देश में 20,671 लोगों पर किया गया है जिनमें 16,860 पुरुष हैं और 3,811 महिलाएं शामिल थीं, सर्वे मार्च से मई महीने के दौरान किया गया, और पाया गया कि 36.2 फीसदी मामलों में तीन महीनों में अलग-अलग तलाक़ दिया गया. 24.7 फीसदी मामले में तलाक दारुल कजा कमेटी के फैसलों से हुए. 21.1 फीसद तलाक कोर्ट या फिर नोटिस के जरिए दिया गया, वहीं 16.9 फीसद मामलों में तलाक किसी एनजीओ या पुलिस या बिरादरी पंचायत के ज़रिए हुआ, महज 0.77 फीसद मामले ऐसे थे जिनमें फौरन तीन तलाक शामिल है |

नशे की हालत में दिए गए तलाक का फीसद महज 0.88 फीसद रहा है, भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन का सेंपल इस सर्वे से काफी छोटा था और उससे डॉ शरीफ जैसा कोई बड़ा स्कॉलर भी नहीं जुड़ा था, मगर उसमें भी एक लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ फैज़ान मुस्तफा के मुताबिक़ तीन तलाक़ के मामलों में टेलीफोन या ईमेल से दिये गये तलाक़ की तादाद बहुत कम पाई गई थी, इस रिसर्च का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ज़्यादातर तलाक़ रिश्तेदारों के दबाव में हुए हैं |

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