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सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, नास्तिक कैसे मांग सकता है मंदिर में प्रवेश का अधिकार?

Supreme Court of India ने सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। कोर्ट ने पूछा कि उत्तर भारत का कोई नास्तिक व्यक्ति सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के अधिकार का दावा कैसे कर सकता है।

सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, नास्तिक कैसे मांग सकता है मंदिर में प्रवेश का अधिकार?

Supreme Court of India ने सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। कोर्ट ने पूछा कि उत्तर भारत का कोई नास्तिक व्यक्ति सबरीमाला मंदिर में प्रवेश के अधिकार का दावा कैसे कर सकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि मंदिर में प्रवेश के अधिकार पर फैसला करते समय यह देखना जरूरी है कि यह मांग किसी श्रद्धालु की ओर से की जा रही है या गैर-श्रद्धालु की ओर से।

9 जजों की संविधान पीठ कर रही है सुनवाई

यह टिप्पणी 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा की गई, जो Sabarimala Temple समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक स्वतंत्रता की सीमाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है। इस पीठ में Surya Kant, B. V. Nagarathna, M. M. Sundresh, Ahsanuddin Amanullah, Aravind Kumar, Augustine George Masih, Prasanna B. Varale, R. Mahadevan और Joymalya Bagchi शामिल हैं।

इंदिरा जयसिंह ने रखा पक्ष

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील Indira Jaising ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं में से एक अनुसूचित जाति की महिला है और उसे मंदिर में प्रवेश से रोकना संविधान के अनुच्छेद 17 का उल्लंघन होगा। उन्होंने कहा कि मंदिर में प्रवेश और पूजा का अधिकार मौलिक अधिकार है, जो अनुच्छेद 25(1) के तहत संरक्षित है।

2018 के फैसले का दिया गया हवाला

सुनवाई के दौरान 2018 के उस ऐतिहासिक फैसले का भी जिक्र हुआ, जिसमें पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के Sabarimala Temple में प्रवेश पर लगी रोक को हटाया था। कोर्ट ने उस समय इस परंपरा को असंवैधानिक करार दिया था।

कोर्ट की प्रतिक्रिया और उठे सवाल

पीठ ने इस दलील पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित महिला को अनुसूचित जाति के कारण नहीं, बल्कि 10 से 50 वर्ष की आयु वर्ग में होने के कारण रोका गया था। सुनवाई के दौरान यह भी पूछा गया कि यह अधिकार कौन मांग रहा है और क्या उसका मंदिर से कोई संबंध है।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने कहा कि क्या यह मांग किसी श्रद्धालु द्वारा की जा रही है या किसी गैर-श्रद्धालु द्वारा, और किसके कहने पर। उन्होंने यह भी कहा कि एक व्यक्ति जिसका इस मंदिर से कोई सीधा संबंध नहीं है, वह दूर बैठे इस तरह का दावा कैसे कर सकता है।

फिलहाल इस मामले की सुनवाई जारी है और इससे जुड़े संवैधानिक पहलुओं पर आगे भी बहस जारी रहने की संभावना है।

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