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एक तांगे वाले से अरबपति बनने का सफर, महाशियां दी हट्टी

एम०डी०एच० मसाले आज हर घर की रसोई की शान है। स्वादिष्ट खाना बनाने के लिए सभी एम०डी०एच० मसालों पर भरोसा करते हैं। मसालों के बाजार में एम०डी०एच० एक बड़ा ब्रांड है और  3 दिसंबर 2020 को मसाला किंग धर्मपाल गुलाटी का निधन हो गया कोरोना से ठीक होने के बाद सुबह 5:38 पर हार्ट अटैक आया और उनकी मौत हो गई। 

आइए एक नजर डालते हैं उनके अब तक के सफर पर -

महाशय धर्मपाल गुलाटी 1947 में बंटवारे के समय दिल्ली आए थे। तब उनके पास सिर्फ 1500 रुपए थे। उनके पिताजी की पाकिस्तान में महाशियां दी हट्टी के नाम से मसालों की दुकान थी। धर्मपाल गुलाटी दिल्ली में आने के बाद पहले तो करोल बाग में तांगा चलाने का काम शुरू किया। फिर बाद में तांगा अपने भाई को दे दिया और चांदनी चौक में एक छोटा-सा मसालों का खोखा खोला। चांदनी चौक में काम चलने के बाद करोल बाग की अजमल-खां रोड पर भी एक और दुकान खोल ली। मसालों का बिजनेस चल निकला। धर्मपाल का कारोबार तेजी से फैलता चला गया। 60 का दशक आते-आते महाशियां दी हट्टी करोल बाग में एक मसालों की मशहूर दुकान बन चुकी थी। अब वह दिल्ली की अलग-अलग जगहों पर दुकान दर दुकान खोलते चले गए। 

इतना ही नहीं उन्होंने लोन लेने जैसा जोखिम भी उठाया और कीर्ति नगर में अपनी मसालों की फैक्ट्री खोल ली। 1953 में किराए की दुकान से शुरू किया गया बिजनेस 1959 में अपनी खुद की फैक्ट्री खोलने के बाद महाशियां दी हट्टी करोल बाग में मसालों की एक मशहूर दुकान बन चुकी थी। महाशियां दी हट्टी अब दुनियाभर में एम०डी०एच० नाम से मसालों की बड़ी ब्रांड बन चुका है और आज इनकी भारत और दुबई समेत करीब 18 फैक्ट्रियां हैं। धर्मपाल गुलाटी का बिजनेस अब 2000 करोड रुपए का हो चुका है। उनकी कंपनी हर साल अरबों रूपये का कारोबार करती है। 

एक तांगे वाले से अरबपति बनने की उनकी ये 60 साल की कड़ी मेहनत और लगन का नतीजा है। सिर्फ पांचवी तक पढ़ाई करने वाले धर्मपाल की इस अद्भुत कामयाबी के लिए भारत सरकार ने महाशय धर्मपाल को पर 2019 में पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया था। 

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