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#बड़ा बयान - बाबर के सेनापति ने मंदिरों के बीच बनाई थी मस्जिद

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर शिया सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड ने एक बड़ा और अहम बयान दिया है। शिया बोर्ड ने सोमवार को कहा है कि 16वीं शताब्दी की शुरुआत में बाबर सेनापति ने मंदिरों के बीच में मस्जिद का निर्माण कराया था और यहीं से हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच विवाद की नींव रखी गई।

#बड़ा बयान - बाबर के सेनापति ने मंदिरों के बीच बनाई थी मस्जिद
लखनऊ. राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर शिया सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड ने एक बड़ा और अहम बयान दिया है। शिया बोर्ड ने सोमवार को कहा है कि 16वीं शताब्दी की शुरुआत में बाबर सेनापति ने मंदिरों के बीच में मस्जिद का निर्माण कराया था और यहीं से हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच विवाद की नींव रखी गई।

आपको बता दें कि राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने कहा है कि अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर बनेगा और मस्जिद उससे थोड़ी दूर हटकर बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मस्जिद को मस्जिदे अमन कहा जाना चाहिए।

वसीम रिजवी ने अपने बयान में कहा कि मीर बाकी बाबर की सेना का कमांडर था। वह शिया था और उसे हिंदुओं की भावनाओं के खिलाफ मुगल सेना का इस्तेमाल किया और 1528-29 में मंदिरों के बीच में एक बड़ी मस्जिद बनवाई। उसने झगड़े की जड़ पैदा करने का काम किया। वसीम रिजवी ने कहा कि 1944 तक उस मस्जिद का इंतजाम शिया समुदाय के पास रहा। सुन्नी वक्फ बोर्ड उस समय ये कहकर मस्जिद पर कब्जा कर लिया कि ये मस्जिद बाबर ने बनवाई। उन्होंने कहा कि उस समय सुन्नी वक्फ बोर्ड ने ये क्यों नहीं कहा कि ये सुन्नी-शिया का मसला नहीं है।

आइये जानते है कौन है मीर बाक़ी-

वसीम रिजवी की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में मीर बाकी को बाबर का सेनापति बताया गया है। जोकि शिया मुसलमान थे। रिजवी का कहना है कि मस्जिद बनवाने वाला जिस समुदाय का होता है, मस्जिद उसी समुदाय की मानी जाती है। रिजवी ने कहा कि मौलवी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नायब सद्र कल्बे सादिक साहब भी विवादित जगह को हिंदू समाज को देने की बात कह चुके हैं।

शिया वक्फ बोर्ड ने यह भी निर्णय लिया है कि आपसी समझौते से मस्जिद का निर्माण विवादित स्थल से दूर किसी मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में किया जाए। शिया बोर्ड उस मस्जिद का नाम मुगल बादशाह बाबर या उसके सेनापति मीर बाकी के नाम पर नहीं रखेगा। बोर्ड चाहता है कि इसका नाम मस्जिद ए अमन रखा जाएगा, जिससे देश में अमन का पैगाम फैले।

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