शिक्षा

मन, वचन, कर्म से भी कोई हिंसा नहीं करनी चाहिए - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

मन, वचन, कर्म से भी कोई हिंसा नहीं करनी चाहिए - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

मन, वचन, कर्म से भी कोई हिंसा नहीं करनी चाहिए - डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

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लखनऊ, 21 जुलाई। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर ऑडिटोरियम में आयोजित विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए बहाई धर्मानुयायी, प्रख्यात शिक्षाविद् व सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. (श्रीमती) भारती गाँधी ने कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को इसलिए उत्पन्न किया है क्योंकि इसकी उत्पत्ति उन्हें तिप्रय थी। उनकी आज्ञा है कि मनुष्यों को किसी के प्रति कोई हिंसा नहीं करनी चाहिए। मनसा, वाचा, कर्मणा अर्थात मन, वचन अथवा कर्म से प्रभु की आज्ञा जो नहीं मानेगा उसे प्रभु का प्रेम कदापि नहीं मिलेगा। श्रीमती गाँधी ने आगे कहा कि मनुष्य किसी का गुलाम नहीं बल्कि स्वतन्त्र इच्छा शक्ति का स्वामी है। वह जो चाहे वह कर सकता है परन्तु किसी के प्रति हिंसा नहीं। प्रभु की इच्छा है कि मनुष्य उनकी शिक्षाओं पर चले और सबसे प्रेम पूर्वक व्यवहार करे। इस युग में प्रभु के शब्द हैं - दुनिया से लड़ाईयाँ बन्द हों, विश्व सरकार का गठन हो। नवयुग का निर्माण इस युग का पैमाना है।

      विश्व एकता सत्संग में आज सी.एम.एस. महानगर कैम्पस के छात्रों ने शिक्षात्मक आध्यात्मिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। स्कूल प्रार्थना सं कार्यक्रमों की शुरूआत करके बच्चों ने अब्दुल कलाम, विनोबा भावे तथा स्वामी विवेकानन्द जैसी महान विभूतियों के विषय में विस्तार से बताया। इस अवसर पर छात्रों ने भजन ‘गॉड इज गुड’, ‘जीवन तुमने दिया है’, प्रार्थना नृत्य ‘तेरा मन दर्पण कहलाए’ आदि के प्रस्तुतिकरण से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा, लघुनाटिका के माध्यम से पर्यावरण संवर्धन का संदेश दिया। इस अवसर पर छात्रों की माताओं ने समूह गीत ‘नेकी की राहों पे तू चल’ एवं ‘जय जगत, जय जगत, जय जगत पुकारे जा’ प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर अनेक विद्वजनों ने सारगर्भित विचार व्यक्त किये। सत्संग का समापन संयोजिका श्रीमती वंदना गौड़ द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

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