हक़ीक़त

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपाई ने तमाम बाधाएं पार कर तीन बार संभाली देश की बागडौर

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपाई ने तमाम बाधाएं पार कर तीन बार संभाली देश की बागडौर

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपाई ने तमाम बाधाएं पार कर तीन बार संभाली देश की बागडौर

Photo

अटल बिहारी वाजपेयी भले ही आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन भारतीय राजनीतिक के पटल पर ये एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व व कृतित्व से न केवल व्यापक स्वीकार्यता और सम्मान हासिल किया, बल्कि तमाम बाधाओं को पार करते हुए 90 के दशक में भाजपा को स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाई।

वाजपेयी ऐसे व्यक्तित्व के धने थे कि जिनके बारे में पूर्व प्रधानमंत्री रहे पं. जवाहर लाल नहरू ने पहले ही कह दिया था कि आने वाले दिनों में यह व्यक्ति जरूर प्रधानमंत्री बनेगा। और आखिरकार वाजपेयी देश के 10 वें प्रधानमंत्री बने। उन्होंने तीन बार देश की बागडोर संभाली।

पहली बार उन्होंने साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, साल 1998 से 19 मार्च से 26 अप्रैल 1999 तक, फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई से 2004 तक। वाजपेयी जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे जिसकी शुरुआत श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 में की थी। वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संघ के पूर्णकालिक सदस्य रहे।

साल 1952 में वाजपेयी ने पहली बार लखनऊ लोकसभा सीट से लड़ा, पर सफलता नहीं मिली। उन्हें पहली बार सफलता 1957 में मिली। जब जनसंघ ने उन्हें तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया। लखनऊ में वो चुनाव हार गए, मथुरा में ज़मानत जब्त हो गई लेकिन बलरामपुर सीट से चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे।

पूरे राजनीतिक जीवन के दौरान वह 10 बार लोकसभा सदस्य चुने गए और दो बार राज्यसभा के सदस्य बने। उन्होंने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश दिल्ली और गुजरात से लोकसभा चुनाव लड़े।

वे 1969 से लेकर 1972 तक पार्टी के अध्यक्ष भी रहे। 1977 में वो मोरार जी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री भी बनाए गए थे। 2004 में आम चुनाव में बीजेपी की हार के बाद उन्होंने भी गिरती सेहत के चलते राजनीति से संन्यास ले लिया।

नवीनतम न्यूज़ अपडेट्स के लिए Twitter, Facebook पर हमें फॉलो करें और हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब कर लें।

Most Popular

-Advertisement-

Facebook

To Top