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ग्रहों की चाल कर सकती है मोदी सरकार का हाल बेहाल

ग्रहों की चाल कर सकती है मोदी सरकार का हाल बेहाल

ग्रहों की चाल कर सकती है मोदी सरकार का हाल बेहाल

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साल 2013 और 2014 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी जी की लहर वर्ष 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों अरविंद केजरीवाल जी की बड़ी जीत से थम गई थी। साल 2014 से ही प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी जी की केंद्र सरकार को कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा है। निरंतर विपक्ष के लोग भारत की केंद्र सरकार पर अनेक लांछन लगाने पर तुले हुए हैं। कभी भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर किसानों को भड़काया जा रहा है। कभी बेमतलब घोटाले में भाजपा को बदनाम किया जा रहा है तो कभी देश के विरुद्ध नारे लगाकर जेएनयू प्रकरण को अंजाम दिया जा रहा है। कभी जाट आरक्षण मामले ने केंद्र सरकार को उलझा रखा है। इसी के साथ-साथ ललित मोदी प्रकरण जो कांग्रेस के समय हुआ था उसका भी इल्ज़ाम भारत की तत्कालीन केंद्र सरकार पर आया। इसके साथ-साथ बिहार विधान सभा चुनावों में अनेक विपक्षी दलों की मिली भगत और भाजपा में भीतर घात के कारण एकजुटता के कारण भाजपा को करारा झटका सहना पड़ा।ज्योतिषशास्त्र के अनुसार भारत को स्वतन्त्रता शुक्रवार दिनांक 15.08.1947 ठीक रात 12 बजे में मिली थी। भारत की कुंडली वृष लग्न की बनती है जिसमें वर्तमान में गुरुवार दिनांक 10.09.2105 से प्रकरमेश अर्थात तीसरे घर के स्वामी चंद्रमा की महादशा चल रही है। चंद्रमा महादशा देश में जनता की भावनाओं के आहात होने का संकेत दे रही है। इसी के साथ ही रविवार दिनांक 10.07.2016 से चंद्रमा की महादशा में मंगल की अंतरदशा प्रारंभ हो जाएगी इसी के साथ पड़ोसी देश की सीमाओं पर लम्बे संघर्ष के योग भी बन जाएंगे क्योंकि मंगल भारत की कुंडली में मंगल सातवें और बारहवें घर का स्वामी होकर सुख भाव में बैठा हुआ है। इसी के साथ-साथ लग्न गोचर में शनिवार दिनांक 20.02.2016 से शनि व मंगल की युति वृश्चिक राशि में हो गयी है। मंगल-शनि की युति कुंडली भारत की कुंडली से सातवें भाव में हो रही है। मेदिनी ज्योतिष अनुसार कुंडली का यह भाव युद्ध व हिंसा को दर्शाता है। मंगल शनि के सातवें भाव में युति के रहने से देश में अराजकता व युद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। राजनैतिक दल भाजपा के इतिहास पर दृष्टि डालने से पता चलता है की भाजपा का उदय रविवार दिनांक 06.04.1980 मध्यान 12 बजे भारतीय राजधानी नई दिल्ली में हुआ था। भाजपा की कुंडली मिथुन लग्न की है तथा इस कुंडली में भाग्य का स्वामी चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान है। वर्तमान समय अनुसार भाजपा कुंडली में सूर्य की महादशा में बुध की अंतरदशा है जो 2016 के अंत तक रहेगी। भाजपा की कुंडली में सूर्य पराक्रमेश होकर मृत्युभाग में है तथा  दशम भाव में विराजमान है। भाजपा की कुंडली में बुध भाग्य भाव में केतु से युति कर रहा है। भाजपा की कुंडली में बुध-केतू की भाग्य में युति के कारण पार्टी पर जातीय और धार्मिक विवादों में मिथ्यारोप लाग्ने का योग बना रहा है। 

 

 

विभिन्न वेब साईट्स से प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का जन्म रविवार दिनांक 17.09.1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी कुंडली पर ध्यान देने पर पता चलता है की उनका जन्म लग्न और जन्म राशि दोनों वृश्चिक हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी पर चंद्रमा की महादशा चल रही है जिसमें की तीसरे और चौथे घर के स्वामी शनि की अंतरदशा चल रही है। वैदिक ज्योतिष सिद्धांत अनुसार वृश्चिक लग्न की कुंडली में शनि अशुभ प्रभाव देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की कुंडली में शनि की अंतरदशा साल 2016 के अंत तक रहेगी। 

मेदिनी ज्योतिष, प्रदेशों व शहरों के नामकरण अनुसार नई दिल्ली भारतीय राजधानी क्षेत्र (अन.सी.आर) वृश्चिक राशि को संबोधित करती है। नई दिल्ली भारतीय राजधानी क्षेत्र (अन.सी.आर) हेतु अगले छे माह जातीय हिंसा और आतंकवाद के प्रबल योग बन रहे हैं। इसी क्षेत्र में विदेशी जासूसों की धरपकड़ भी होने की प्रबल आशंका बन रही है। भारत की केंद्र सरकार भाजपा द्वरा शशित है जिसकी चंद्र राशि वृश्चिक है तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की भी चंद्र राशि  वृश्चिक है। अतः भाजपा तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी पर प्रस्तुत गोचर अनुसार शनि-मंगल की युति के कारण दोनों की स्थिति संकट में आ सकती है।

बुधवार दिनांक 09.03.2016 को पड़ा खग्रास सूर्य-ग्रहण स्वतंत्र भारत की कुंडली के दसवें भाव में घटित हुआ। दसवां भाव कानून व्यवस्था और सत्ता को इंकित करता है। दसवें भाव में ग्रहण का बनना उपद्रव, हिंसा और सीमाओं पर तनाव के योग बना रहा है। खग्रास सूर्य-ग्रहण कुंभ राशि में हुआ था जिस पर मंगल की चौथी दृष्टि पड़ने के कारण खग्रास सूर्य-ग्रहण का प्रभाव बेहद तेज़, हिंसक और दीर्ध कालीन रहेगा। इस ग्रहण के कारण आतंकी संगठनों का रुख तेज़ हो सकता है जिसके चलते युद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। इसी के साथ-साथ ग्रहण की सीधी दृष्टि पहले से रशु से पीड़ित सिंघस्त गुरु पर पड़ने के कारण धार्मिक विवाद उत्तपन हो सकते हैं।

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