
लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के लिए घोषित समर्थन मूल्य सरकार की दृष्टि में भले ही डेढ गुना हो लेकिन यह ऊंट मुंह में जीरा जैसा है और इसमें कुछ नया भी नही हैं क्योकि यह पूर्व घोषित बजट में ही वित्त मंत्री अरूण जेटली ने घोषित कर दिया था। भारतीय जनता पार्टी इस विवेकहीन फैसले को ऐतिहासिक फैसला बता रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में फसलों को समर्थन मूल्य डेढ गुना घोषित करने की घोषणा की गयी थी आष्चर्य है कि उसकी याद देष के प्रधानमंत्री को साढे चार साल बाद आयी है और वह भी खरीफ की फसल के समय।
श्री दुबे ने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल के साथ साथ अनेको किसान संगठनों ने स्वामीनाथन आयोग की कमेंटी के अनुसार सम्पूर्ण लागत (सी2) पर आधारित लाभकारी समर्थन मूल्य तय करने की मांग की गयी थी। इस सम्पूर्ण लागत में लागत (ए2) $ पारिवारिक श्रम $ (एफएल) जमीन का किराया और ब्याज आदि शामिल है।उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के चुनावी भाषणों में नरेन्द्र मोदी जी ने सी2 की भांति समर्थन मूल्य देना प्रचारित किया था परन्तु वर्तमान फैसला सिर्फ ए2 और एफएल के आधार पर लिया गया है। इस प्रकार का फैसला यु0पी0ए0 सरकार भी कर चुकी है फिर इसमें वर्तमान प्रधानमंत्री ने नया क्या किया है। उसी प्रकार का फैसला साढे चार वर्ष के बाद लेकर अपनी पीठ थपथपाना विवेकहीनता का परिचायक है।
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल इस फैसले को किसानों के साथ धोखा मानता है और गांव गांव में चैपाल लगाकर इस सन्दर्भ में किसानों को जन जागरण के माध्यम से 13 जुलाई से 10 अगस्त तक वास्तविकता का ज्ञान करायेगा तथा इस सन्दर्भ में बढे आन्दोलन की रूपरेखा राष्ट्रीय लोकदल तैयार करेगा।
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