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पूजा के अंत में हर रोज बोलें ये 4 पंक्तियां

पूजा के अंत में हर रोज बोलें ये 4 पंक्तियां

पूजा के अंत में हर रोज बोलें ये 4 पंक्तियां

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हिन्दू धर्म में पूजा आरती का बहुत महत्व है। कहते हैं कि जिस किसी भी घर में यदि ईश्वर की रोजाना पूजा और आराधना होती है वह घर सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है। प्रतियोगिता के इस दौर में पूजा भावनाओं को ताकत देती है। इसलिए घर में रोज भगवान की पूजा करनी चाहिए। पूजा के अंत में धार्मिक कर्म खासकर देव पूजा व आरती के आखिर में की जाने वाली चार कामनाएं करने का भी विधान है। धर्म भावों से सराबोर ये केवल चार बातें व्यावहारिक जीवन में आने वाले हर मुश्किल वक्त दुविधा और बुरे विचारों से छुटकारे का बेहद ही सरल उपाय भी हैं : 

धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, विश्व का कल्याण हो।

रोज भगवान की पूजा और आरती के बाद बोली जाने वाली इन पंक्तियों में चार गूढ़ अर्थ वाली बातें कही गई हैं। पहली पंक्ति में धर्म का जयकारा  कार्य के प्रति सत्य, निष्ठा, समर्पण के लिए है। अधर्म के नाश की बात ईर्ष्या, द्वेष, स्वार्थ से परे होने के लिए संकल्पित करती है। तीसरी पंक्ति सद्भाव यानी मेलजोल व तालमेल से कार्य व जीवन को साधने का सूत्र है। कार्यक्षेत्र में इसे टीम वर्क भी पुकारा जाता है।पहली तीन बातों को संकल्प के साथ अपनाने पर जीवन में सफलता मिलती है और दूसरों के कल्याण की भावना मन में होती है। इन चार पंक्तियों को पूजा के अंत में रोज बोलने से जीवन पर बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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