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शनि को शांत करने के लिए क्यों किया जाता है हनुमान जी का पूजन

शिव पुराण के अनुसार हनुमान जी को ग्यारवां रूद्र माना जाता है और शनिदेव भगवान शंकर के परम भक्त और चेले भी हैं। भगवान शंकर ने ही शनि देव को संसार का न्यायाधिश होने का कार्य दिया है परंतु न्याय करते समय शनि देव व्यक्ति के कर्म अनुसार उससे अत्यधिक पीड़ित कर देते हैं। पुराणों

शनि को शांत करने के लिए क्यों किया जाता है हनुमान जी का पूजन

शिव पुराण के अनुसार हनुमान जी को ग्यारवां रूद्र माना जाता है और शनिदेव भगवान शंकर के परम भक्त और चेले भी हैं। भगवान शंकर ने ही शनि देव को संसार का न्यायाधिश होने का कार्य दिया है परंतु न्याय करते समय शनि देव व्यक्ति के कर्म अनुसार उससे अत्यधिक पीड़ित कर देते हैं। पुराणों के अनुसार उन्होंने न सिर्फ मनुष्य को यहां तक की देवी-देवताओं को भी पीड़ित किया है जिसमें भगवान गणेश और चन्द्रदेव भी शामिल हैं। शनिदेव पर नियंत्रण रखने के लिए भगवान शंकर द्वारा शनि देव को समय-समय पर हनुमान जी द्वारा पीड़ित करवाया गया। शनि देव को शांत करने के लिए हनुमान जी की अराधना की जाती है तथा कुछ छोटे-छोटे उपाय कर शनि के प्रकोप से मुक्ति पाई जा सकती है।* साढ़सती में हनुमान जी पर चमेली का तेल चढ़ाने से साढसती में राहत मिलती है।

* 8 बरगद के पत्ते हनुमान जी पर काले धागे में पिरोकर चढ़ाने से शनि बाधा से मुक्ति मिलती है।

* हनुमान जी पर लौंग लगा पान का बीड़ा चढ़ाने से शनि द्वारा जनित दुर्भाग्य समाप्त होता है।

* हनुमान जी पर कागजी बादाम चढ़ाकर आधे बादाम काले कपड़े में बांधकर घर की दक्षिण दिशा में छुपा कर रखने से शनि का कोप शांत हो जाता है।

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