शिक्षा

संस्कारों व जीवन मूल्यों के बिना शिक्षा अधूरी है- डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

संस्कारों व जीवन मूल्यों के बिना शिक्षा अधूरी है- डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

संस्कारों व जीवन मूल्यों के बिना शिक्षा अधूरी है- डा. (श्रीमती) भारती गाँधी

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लखनऊ, 30 दिसम्बर। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, गोमती नगर ऑडिटोरियम में आयोजित विश्व एकता सत्संग में बोलते हुए बहाई धर्मानुयायी, प्रख्यात शिक्षाविद् व सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. (श्रीमती) भारती गाँधी ने कहा कि शिक्षा ही मनुष्य में मानवता का संचार करती है। जब शिक्षा में संस्कारों व जीवन मूल्यों का समावेश होता है तभी शिक्षा उद्देश्यपूर्ण कहलाती है और मनुष्य में मनुष्यता का विकास संभव हो पाता है। डा. गाँधी ने शिक्षकों व अभिभावकों का आह्वान किया कि बच्चे के कोमल मन में शुरू से ही उच्च जीवन मूल्यों व संस्कारों के बीज बो दें एवं अपने स्वयं के व्यवहार द्वारा सिखायें कि कर्म ही पूजा है, चरित्र निर्माण पर जोर दें एवं सर्वधर्म समभाव की सीख दें। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि घर पर एक स्वच्छ, शान्तिमय व सद्भाव का वातावरण बनायें जिससे बालक स्वतः ही पढ़ाई लिखाई व अच्छे गुणों को अपनाने के लिए आकर्षित हो व माता-पिता और गुरुजनों का आदर सत्कार करे। इससे पहले, सी.एम.एस. के संगीत शिक्षकों ने सुमधुर भजनों की श्रृंखला प्रस्तुत कर सम्पूर्ण आडिटोरियम को आध्यात्मिक आलोक से प्रकाशित कर दिया तथापि उपस्थित सत्संग प्रेमियों को सुखद अनुभूति करायी।

विश्व एकता सत्संग में आज कई विद्वजनों ने सारगर्भित विचार व्यक्त किये। डा. बी. एन. सिंह ने कहा कि  यदि मनुष्य अपना मन एवं बुद्धि का अहंकार छोड़कर ईश्वर को समर्पित हो जाए तो उसका कल्याण हो जायेगा। श्री गोदरेज जी ने कहा कि मनुष्य अपनी क्षमताओं का विकास करके बहुत ऊँचाई तक जा सकता है किन्तु ईश्वर नहीं बन सकता।  एक अन्य वक्ता ने कहा कि मनुष्य अपने स्वयं के प्रयत्नों से ही ईश्वर की शरण प्राप्त कर सकता है। अन्य वक्ताओं में श्री एच के आब्दी, श्री तुलाराम व अन्य विद्वजनों ने अपने विचार रखे। सत्संग का समापन संयोजिका श्रीमती वंदना गौड़ द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।


 

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