शिक्षा

इजिप्ट मे ‘अन्तर्राष्ट्रीय अफ्रीकी संवैधानिक सम्मेलन’ में विशिष्ट अतिथि होंगे डा. जगदीश गाँधी

इजिप्ट मे ‘अन्तर्राष्ट्रीय अफ्रीकी संवैधानिक सम्मेलन’ में विशिष्ट अतिथि होंगे डा. जगदीश गाँधी

इजिप्ट मे ‘अन्तर्राष्ट्रीय अफ्रीकी संवैधानिक सम्मेलन’ में विशिष्ट अतिथि होंगे डा. जगदीश गाँधी

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लखनऊ, 7 फरवरी। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी इजिप्ट की राजधानी काहिरा में आयोजित हो रहे अफ्रीकी संवैधानिक न्यायालयों, परिषदों व सर्वोच्च न्यायालयों के तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय संवैधानिक सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग करेंगे। इजिप्ट के सुप्रीम कान्स्टीट्यूशनल कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डा. हनफी एली गेबाली ने इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन प्रतिभाग हेतु डा. जगदीश गाँधी को विशेष रूप से आमन्त्रित किया है। सम्मेलन का आयोजन 16 से 19 फरवरी तक इजिप्ट के राष्ट्रपति महामहिम अब्देल फतह अल सीसी के तत्वावधान में किया जा रहा है। सम्मेलन में प्रतिभाग हेतु डा. जगदीश गाँधी 15 फरवरी को इजिप्ट रवाना होंगे। सी.एम.एस. द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किये जाने वाले अन्तर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन के प्रोजेक्ट लीडर श्री संदीप श्रीवास्तव भी डा. गाँधी के साथ इजिप्ट जायेंगे।

सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने बताया कि इजिप्ट की राजधानी काहिरा में आयोजित हो रहे इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में डा. जगदीश गाँधी को आमन्त्रित किया जाना लखनऊ व प्रदेश के लिए गौरव का विषय है जो अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर लखनऊ का नाम गौरवान्वित करेगा। डा. गाँधी के मार्गदर्शन में सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ पिछले 18 वर्षों से लगातार विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करता आ रहा है। इस अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अभी तक विश्व के 133 देशों के 1222 से अधिक मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश एवं राष्ट्राध्यक्ष आदि प्रतिभाग कर चुके हैं तथावि विश्व की न्यायिक बिरादरी ने सी.एम.एस. की विश्व एकता, विश्व शान्ति व विश्व के ढाई अरब बच्चों के सुरक्षित भविष्य की मुहिम को भारी समर्थन दिया है।

श्री शर्मा ने बताया कि काहिरा में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में डा. गाँधी विशेष तौर से ‘भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51’ एवं भारत की ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की संस्कृति पर अपने विचार रखेंगे। डा. गाँधी का मानना है कि जब तक विश्व समुदाय में एकता, समानता व शान्ति का वातावरण नहीं बनेगा, तब तक भावी पीढ़ी का भविष्य भी सुरक्षित नहीं है। विश्व के ढाई अरब बच्चे अपने लिए सुरक्षित भविष्य चाहते हैं जहाँ भावी पीढ़ी एकता, शान्ति, सहयोग व सौहार्द के वातावरण में फल-फूल सके।

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