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सौरव गांगुली ने अपनी आत्मकथा ‘ए सेंचुरी इज नॉट इनफ’ में किये कई खुलासे

सौरव गांगुली ने अपनी आत्मकथा ‘ए सेंचुरी इज नॉट इनफ’ में किये कई खुलासे

सौरव गांगुली ने अपनी आत्मकथा ‘ए सेंचुरी इज नॉट इनफ’ में किये कई खुलासे

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भारत के सफलतम कप्तानों में शुमार सौरव गांगुली ने अपनी आत्मकथा ‘ए सेंचुरी इज नॉट इनफ’ में कई खुलासे किए हैं। इसमें कई मजेदार यादें भी हैं। एक इंटरव्यू में गांगुली ने पाकिस्ता‍न में मिली मेहमाननवाजी को ‘अकल्पनीय’ बताया है, बंगाल टाइगर के नाम से मशहूर गांगुली ने कहा कि ‘मुझे पाकिस्तान बेहद पसंद आया।’ उन्होंने कहा, पाकिस्ता‍न में कठोरता है, खूबसूरती है। यह अलग है। यह कठोर देश है, नरम भी है और उन्हें अपने क्रिकेट से बेहद प्यार है।’

गांगुली ने आगे बताया, ‘वहां खाना, मेहमाननवाजी, दयालुता है। होटल रूम में लोग आपकी मदद करते हैं, वहां भारत की धाक है। आप इंडिया से हैं, आपका देश इतना अच्‍छा है! वो हमारी फिल्‍मों से प्रभावित हैं। मुझे वहां का दौरा करने में मजा आया, शायद हम वहां अच्‍छा खेले इसलिए भी। हम 2006 में भी गए तो उस समय भी वैसा ही माहौल मिला।’ अपने पाकिस्तानी दौरे के अनुभवो को याद करते हुए गांगुली ने बताया कि पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम पर फैंस का दबाव तो होता ही है। मुझे याद है कि पाकिस्‍तान में 2005 में हमने टेस्‍ट और वनडे सीरीज जीती। उन्‍हें वर्ल्‍ड कप 2003 में सेंचुरियन में हराया। मुझे आर्मी चीफ का फोन आया कि उन्‍हें हराने के लिए वेल डन।’

गांगुली ने अपने आत्मकथा में कैप्टन कूल कहे जाने वाले महेंद्र सिह धोनी के बारे में भी एक बहुत ही सुंदर और खास बात लिखी है। गांगुली ने इच्छा जताई है कि काश महेंद्र सिंह धोनी विश्व कप 2003 में भारतीय टीम में होते तो शायद फाइनल मैच का परिणाम कुछ और होता। गांगुली ने लिखा है कि अपने कप्तानी के कार्यकाल के दौरान मैं घरेलू क्रिकेट के ऐसे खिलाड़ि‍यों पर नजर रखता था जो दबाव के क्षणों में भी शांत रह सकें और अपनी योग्यता से मैच की तस्‍वीर बदल सकें। धोनी भी ऐसे ही खिलाडियों में से थे लेकिन उन पर मेरा ध्यान 2004 में ही जा सका। गांगुली ने इच्छा जताई कि काश वो हमारे साथ 2003 विश्व कप में होते।
 

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