अंतर्राष्ट्रीय

मसले को बल से नहीं, बातचीत से निपटाना चाहिए : शिंजो अबे

मसले को बल से नहीं, बातचीत से निपटाना चाहिए : शिंजो अबे

मसले को बल से नहीं, बातचीत से निपटाना चाहिए : शिंजो अबे

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डोकलाम में भारत और चीन में बने गतिरोध के बीच जापान की तरफ़ से बयान आया है कि यथास्थिति बदलने के लिए ताकत का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. जापान के ज़्यादातर अख़बारों ने यही कहा है कि मसले को बल से नहीं, बातचीत से निपटाना चाहिए. इस बात से ये साबित होता है कि जापान भारत के पक्ष में आ रहा है, मगर उसकी अपनी चिंताएं हैं सेंसाकू द्वीपसमूह को लेकर | चीन दरअसल सेंकाकू को लेकर जापान से नहीं बल्कि अमरीका से ज़ोर आज़माइश कर रहा था, मगर अमरीका ने कहा कि जापान के साथ हमारा समझौता है कि अगर किसी ने सेंकाकू पर हमला किया तो जवाब हम देंगे, इसके बाद चीन थम गया, अमरीका से भारत की करीबी से चिढ़ा है चीन

पिछले दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरीका गए थे, शायद अमेरिका और भारत की करीबी चीन को पसंद नहीं आई | अमरीकी विचारकों का भी कहना है कि डोकलाम में सड़क बनाने से चीन को ज़्यादा फ़ायदा नहीं होगा,मगर भारत को नुक़सान होगा | अब चीन इतनी ज़्यादा तैयारी कर चुका है, ब्लड बैंक में ख़ून जमा किया जा रहा है, 40 एय़रक्राफ्ट लगा दिए हैं ,ऐसे में अगर वे कुछ नहीं करते तो उनकी बेइज़्ज़ती होगी, तो ऐसी स्थिति बन रही है, जहां लगता है कि भूटान के पास कुछ हो सकता है |

इस मामले में जापान भारत का साथ तो देगा, मगर किस हद तक देगा, यह कहा नहीं जा सकता | 13 और 15 सितंबर को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे भारत आएंगे और संयुक्त सैन्य अभ्यास भी होगा इससे लगता है कि जापान हिंदुस्तान को डोकलाम में समर्थन करेगा | जिन देशों का दक्षिण चीन सागर को लेकर चीन से विवाद है, क्या वे भारत के साथ आएंगे? हम उन मुल्कों से बयानों की उम्मीद तो कर सकते हैं, मगर उनका समर्थन किस हद तक मिलेगा, यह नहीं कहा जा सकता, अगर भारत की लड़ाई हुई तो अकेले ही लड़ना होगा |


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