स्वास्थ्य

अपनी इन आदतों की वजह से डिप्रेशन का शिकार होती हैं महिलाएं

अपनी इन आदतों की वजह से डिप्रेशन का शिकार होती हैं महिलाएं

अपनी इन आदतों की वजह से डिप्रेशन का शिकार होती हैं महिलाएं

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आजकल बिजी लाइफस्टाइल के चलते लोगों में  तनाव होना बहुत ही आम बात हो गई है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक तनाव में आती है। इसका एक कारण यह भी है कि महिलाओं के पास जॉब के अलावा भी कई जिम्मेदारियां होती है। जिसका अप्रत्यक्ष रूप से उन पर इसे अच्छी तरह निभाने का भी दबाव रहता है। जैसे क्या मेरा प्रोजेक्ट सक्सेसफुल होगा? रात में यात्रा करते समय मैं सुरक्षित रह सकूंगी? मेरे बच्चे किसी मुसीबत में तो नहीं पड़ेंगे? घर लौटने में लेट होने के कारण पति नाराज तो नहीं हो जाएंगे? पति का किसी के साथ अफेयर तो नहीं है? मेरे आसपास इतने सारे लोग हैं, फिर भी मुझे अकेलापन क्यों महसूस होता है? क्या मुझे प्रोफेशनल हेल्प की जरूरत है?

हम चर्चा करेंगे उन कारणों पर कि क्यों तनाव इतना बढ़ जाता है कि खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है और क्या है उसे नियंत्रण में रखने के जांचे-परखे उपाय, ताकि उसके नकारात्मक प्रभावों को बदलकर सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सके। जिसकी मदद से जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाना संभव हो सके। यहां यह गौर करना जरूरी है कि क्यों तनाव व चिंताएं बढ़कर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाती है। आइए जानते हैं तनावमुक्त रहने की कुछ टिप्स-

हमेशा पॉजिटिव रहे

क्रोध और निराशा को सकारात्मक विचारों और ऊर्जा में परिवर्तित करें। ऐसी आदतें विकसित करें, जिससे तनाव को दूर भगाना आसान हो सके। रोज का कार्य रोजाना निपटाने की कोशिश करें। मामला चाहे ऑफिस का हो या घर-परिवार का। व्यवस्थित दिनचर्या से तनाव दूर रखने में मदद मिलती है।

हमेशा शांत रहें

कोई आपको नकारात्मकता की ओर उकसाने की कितनी भी कोशिश करे, पर आप शांत  रहेंगी। कार्य और घर-परिवार की जिम्मेदारियां कभी खत्म नहीं होतीं। उनके मध्य आपको अपने हृदय में शांति और सुकून का भाव जगाना होगा। एक कार्य पूरा करने के बाद कुछ देर ब्रेक लेकर गहरी सांसें लें, ऊर्जा का संचय करें और फिर नए कार्य में लगें।
 
भविष्य को लेकर न रहें चिंतित

मन से डर को निकालें। यकीन मानिए, हर समस्या का समाधान होता है। कई बार दोस्त, परिवार या सहकर्मी की मदद से या हम स्वयं ही समस्या का समाधान खोजते हैं। वहीं, कई बार समय के साथ ही उस समस्या का हल मिल जाता है। भविष्य को लेकर संशय व समस्याओं को गंभीर तनाव का कारण न बनने दें।

चिंता को आदत न बनाएं

चिंता की प्रवृत्ति को आदत न बनने दें। भविष्य में होने वाली घटनाओं को लेकर आशंकित व उधेड़बुन में पड़े रहने के बजाय तर्क का रास्ता अपनाएं। जब कभी भविष्य को लेकर आशंकित महसूस करें तो जो कार्य कर रही हों उससे थोड़ी देर का ब्रेक ले लें। किसी दूसरे विचार पर ध्यान केन्द्रित करके मस्तिष्क को शांत करने का प्रयास करें। लंबे समय से चली आ रही चिंता व तनाव की स्थिति में प्रोफेशनल मदद की जरूरत होती है। इसलिए अगर आपको इसकी जरूरत महसूस हो तो मदद लेने में हिचक महसूस न करें। आपको बस अपने सोचने के तरीके में बदलाव लाने के लिए मदद की जरूरत है, ताकि आप जिंदगी में प्रसन्न व ऊर्जावान महसूस कर सकें।

समस्या के बारे में ज्यादा न सोचें

किसी भी चिंता या तनाव को पूरे दिन स्वयं पर हावी न रहने दें। जीवन में कोई समस्या या उलझन है तो उस ओर ध्यान जाना स्वाभाविक है, पर लगातार उस दिशा में सोचते रहना भी ठीक नहीं है। उस ओर से दिमाग हटाकर किसी अन्य महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान केन्द्रित करें या कुछ दिनों के लिए घूमने निकल जाएं। इस तरह नयी ऊर्जा से पूर्ण होकर समस्या का हल तलाशने की कोशिश करें। याद रखें कि इस दुनिया में ऐसा कोई शख्स नहीं है, जिसके जीवन में चिंताएं और तनाव न हों। ये सब आधुनिक जिंदगी का हिस्सा हैं, इसलिए खुशमिजाज रहते हुए युक्तिपूर्वक उनका सामना करें। अपनी रोजाना की जिंदगी में चिंताओं के बिंदुओं को सूचीबद्ध करें और व्यवस्थित रूप में उनका समाधान सुनिश्चित करें। अगर किसी समस्या का हल सूझ न रहा हो तो उसे कुछ समय के लिए यूं ही छोड़ देना बेहतर है।
 

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