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जाग उठे चेतन , डिस्चार्ज होते ही बोले- इट्स रॉकिंग

जाग उठे चेतन , डिस्चार्ज होते ही बोले- इट्स रॉकिंग

जाग उठे चेतन , डिस्चार्ज होते ही बोले- इट्स रॉकिंग

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हॉस्पिटल से निकलते समय जब उनसे पूछा गया कि आपकी तबियत कैसी हैं तो चेतन ने तुरंत जवाब दिया - इट्स रॉकिंग। सीआरपीएफ के डॉक्टरों ने बताया कि चेतन को आठ गोलियां लगी थीं। इनमें से तीन गोलियों ने उन्हें जख्मी कर दिया था। पांच गोलियां बुलेट प्रूफ जैकेट में फंस गई थीं। एक गोली दाहिने हाथ दूसरी बाएं हाथ में लगी और तीसरी जांघ से होते हुए कूल्हे और रेक्टम को जख्मी कर गई थी। उन्हें ग्रेनेड के स्प्लिन्टर भी लगे थे। स्प्लिन्टर से जख्मी होने के कारण दाईं आंख की रोशनी चली गई। हॉस्पिटल से निकलते समय चेतन कमजोर तो दिख रहे थे पर उनके इरादे बुलंद हैं। चेतन की पत्नी बोलीं भरोसा था जल्दी ठीक हो जाएंगे- चेतन की पत्नी उमा सिंह कहती हैं कि मैं जब श्रीनगर से एयर एम्बुलेंस में चेतन को लेकर दिल्ली आ रही थी तब चेतन बेहोश थे। पर चलती सांसों ने हौसला दिया कि ये जरूर ठीक होकर बाहर आएंगे। 

चेतन बेहद टफ हैं और उन्हें फिटनेस का भी जुनून है। उनके लिए तो ये भी मददगार ही साबित हुआ। जब वो कोमा में थे तब भी जब मैं उनका हाथ पकड़ती तो उनकी उंगलियां हिल जाती थीं। तब लगता था कि ये जल्द ही ठीक हो जाएंगे।एम्स लाए गए तो डॉक्टरों को भी उम्मीद नहीं थीअब कहा चमत्कार हुआ  14 फरवरी को घायल होने के बाद चीता को श्रीनगर के मिलिट्री हॉस्पिटल में लाया गया। खून रोकने के लिए दवाइयां दी गईं पर हालत खराब हो रही थी। इसलिए एयरलिफ्ट कर दिल्ली एम्स लाया गया।- चेतन की दाहिनी आंख कमर पैर हाथ और पेल्विक रीजन में चोटें आई थीं। एम्स लाने के 24 घंटे के भीतर डॉक्टरों ने ब्रेन का ऑपरेशन किया। हालांकि चेतन के सिर में गोली नहीं लगी थी। लेकिन दिमाग पर पड़ने वाला खतरनाक इंट्रा क्रेनियल प्रेशर बढ़ता जा रहा था।- ब्रेन में क्लॉट भी था इसलिए ऑपरेशन जरूरी था। इन्फेक्शन राेकने के लिए हेवी एंटी-बायोटिक्स दी जाने लगी। 25 दिन कोमा में रहे। तब उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। 16 मार्च को वेंटिलेटर से हटाकर जनरल वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया। जब सभी अंग स्थिर हो गए तो डॉक्टरों की अलग-अलग टीमें चोटों पर काम करने लगीं। ऑर्थोपेडिक टीम ने पैरों के फ्रैक्चर का इलाज किया। ऑपथेल्मोलॉजिस्ट ने बायीं आंख बचा ली। पर दाहिनी आंख नहीं बचा पाए। इनके अलावा न्यूरोलॉजिस्ट और प्लास्टिक सर्जन भी इलाज कर रहे थे।19 मार्च को चेतन को पहली बार खाना दिया गया- एम्स के डॉक्टर अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि जब चेतन को दिल्ली लाया गया तो उनकी ग्लास्गो कोमा स्कोर एम 3 था। वह कोमा में थे। अब यह एम 6 है। यह चमत्कार है। उनका दूसरा जन्म है। ऐसे में परिवार हिम्मत खो देता है। पर चेतन की पत्नी पत्थर की तरह डटी रहीं।- बुधवार को गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू भी चेतन से मिलने पहुंचे। उन्होंने चेतन से कहा- आय वान्ट टू सी यू इन यूनिफॉर्म अगेन।घायल होने पर भी 16 राउंड फायर किए थे और एक आतंकी को मार गिराया था- राजस्थान के कोटा के रहने वाले चेतन की उम्र 45 साल है। वे सीआरपीएफ की 45 बटालियन के कमांडेंट हैं। कश्मीर के बांडीपोरा में एनकाउंटर के दौरान चेतन घायल होने के बावजूद आतंकियों से लड़ते रहे। गोली लगने के बाद 16 राउंड फायर किए। मुठभेड़ के दौरान लश्कर के कमांडर अबु मुसैब को मार गिराया। इस मुठभेड़ में तीन जवान भी शहीद हुए थे।














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