उत्तर प्रदेश

खाना सबको चाहिए, लेकिन खेती कोई नहीं करना चाहता- गिरिराज सिंह

खाना सबको चाहिए, लेकिन खेती कोई नहीं करना चाहता- गिरिराज सिंह

खाना सबको चाहिए, लेकिन खेती कोई नहीं करना चाहता- गिरिराज सिंह

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केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप) द्वारा आयोजित किसान मेले में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने न केवल संस्थान द्वारा औषधीय और सुगंधीय पौधों की किस्मों के विकास के बारे में जाना बल्कि उन्होंने किसानों की समस्या को भी बारीकी से समझा। उन्होंने कहा आज खेती एक आश्चर्य बन चुकी है और विडम्बना यह है कि भोजन सबको चाहिए लेकिन खेती करना कोई नहीं चाहता। सीएसआईआर-सीमैप पिछले चौदह सालों से किसान मेले का आयोजन कर रहा है।इसमें न केवल सुगंधीय पौधों के बारे में जानकारी दी जाती है बल्कि इसकी खेती के लिए उपाय और जानकारी दी जाती है।

सीमैप द्वारा आयोजित किसान मेले में आये किसानों और दर्शकों को संबोधित करते हुए इस मेले के मुख्य अतिथि गिरिराज सिंह, केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने कहा कि अब तक तो गांवों 70 प्रतिशत किसान हुआ करते थे लेकिन अब उनकी संख्या घटकर महज 58 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने किसानो और खेती के प्रति घटते लगाव के बारे में महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि पांडव अज्ञातवास में जब जंगल-जंगल भटक रहे थे तो उस समय युधिष्ठिर-यक्ष संवाद के दौरान यक्ष ने पूछा दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? उस समय युधिष्ठिर ने उत्तर दिया था 'मृत्यु', क्योंकि मरना सबको है लेकिन मरना कोई नहीं चाहता, लेकिन आज के समय में अगर ये सवाल उठता तो तो जवाब होता 'खेती,' क्योंकि भोजन सबको चाहिए लेकिन खेती करना कोई नहीं चाहता।

इससे पहले अपने स्वागत भाषण में सीएसआईआर-सीमैप के डायरेक्टर प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी बताया कि इस साल सीएसआईआर-एरोमा मिशन के किसान मेला में आये किसानों को नई जानकारी और टेक्नोलॉजी के बारे में बताया जाएगा ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके, जो कि मिशन का मुख्य उद्देशय है। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष लखनऊ हेडक्वार्टर से से लगभग 500 क्विंटल अधिक उपज देने वाली मेंथा की प्रजाति की जड़ें के रूप में जिंदल ड्रग्स और रीगले कंपनी के वित्तीय सहयोग से किसान मेले में 20% छूट के साथ उपलब्ध कराई गई हैं. इसके अलावा पन्तनगर केंद्र से आने वाली 8 फरवरी को मेले के अवसर पर 200 क्विंटल उन्नत क़िस्मों की अतिरिक्त जड़ें किसानों को दी जायेंगी।
 

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