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#राफेल डील, कोर्ट में करीब 4 घंटे तक बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

#राफेल डील, कोर्ट में करीब 4 घंटे तक बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

#राफेल डील, कोर्ट में करीब 4 घंटे तक बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

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सुप्रीम कोर्ट ने वायु सेना के लिये फ्रांस से 36  राफेल लड़ाकू विमान खरीदे जाने के मामले की कोर्ट की निगरानी में जांच के लिये दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट में करीब चार घंटे तक बहस चली। सरकार और याचिकाकर्ताओं ने अपनी अपनी दलीलें रखीं। कोर्ट ने भी कई सवाल किए। दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने विभिन्न पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।  

इससे पहले न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लड़ाकू विमान की कीमतों के बारे में अदालत में बहस का तब तक सवाल नहीं उठता जब तक इस बात का निर्णय न हो जाये कि कीमत की जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है या नहीं। न्यायालय ने साथ ही, इस मामले में सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए भारतीय वायुसेना के एक शीर्ष अधिकारी को आज ही तलब किया। खंडपीठ में पेशे से वकील मनोहर लाल शर्मा, विनीत ढांडा और प्रशांत भूषण, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी एवं यशवंत सिन्हा सहित विभिन्न याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई हुई। 

पहले शर्मा औरढांडा ने जिरह की, उसके बाद प्रशांत भूषण ने खुद अपनी ओर से तथा शौरी एवं सिन्हा की ओर से अपनी दलीलें पेश की। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अदालत में राफेल की कीमत में बारे में बहस का तब तक कोई सवाल नहीं उठता, जब तक यह निर्णय नहीं हो जाता कि कीमतों के बारे में जानकारी सार्वजनिक की जानी है या नहीं। न्यायालय ने भोजनावकाश से पहले केंद्र की ओर से पेश एटर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से पूछा कि क्या अदालत में भारतीय वायु सेना का कोई अधिकारी मौजूद है, क्योंकि वह उस अधिकारी से कुछ जानकारी लेना चाहता है। 

न्यायालय ने वायु सेना के किसी अधिकारी को अदालत कक्ष में पेश करने का निर्देश दिया। भोजनावकाश के बाद जैसे ही सुनवाई शुरू हुई, एयर वाइस मार्शल टी चलपती अदालत कक्ष में न्यायालय के सवालों के जवाब देने के लिए मौजूद थे। उनके साथ वायुसेना के कुछ अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। खंडपीठ ने वायुसेना अधिकारी से कई महत्वपूर्ण सवाल किये, जिनमें वायुसेना के लिए समय-2 पर हुई खरीद और उसकी प्रक्रिया आदि से जुड़े प्रश्न शामिल थे। अधिकतर याचिकाकर्ताओं ने राफेल सौदे की जांच अदालत की निगरानी में एसआईटी से कराने की मांग की है। 

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