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साध्वी प्रज्ञा को NIA ने दी क्लीन चिट, बाकी आरोपियों पर से हटाया MCOCA

साध्वी प्रज्ञा को NIA ने दी क्लीन चिट, बाकी आरोपियों पर से हटाया MCOCA

साध्वी प्रज्ञा को NIA ने दी क्लीन चिट, बाकी आरोपियों पर से हटाया MCOCA

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मुंबई. एनआईए ने 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को क्लीन चिट दे दी है। एजेंसी ने यू-टर्न लेते हुए साध्वी और 5 अन्य पर लगे सारे आरोप हटा लिए हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित सहित बाकी 10 आरोपियों पर लगी मकोका की कड़ी धाराओं को भी जांच एजेंसी ने हटा लिया है। एनआईए ने क्या दिए तर्क...

- एनआईए ने शुक्रवार को कहा- जांच के दौरान प्रज्ञा और पांच अन्य के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं पाए गए।
- इसके साथ ही जांच एजेंसी ने मामले में फाइनल रिपोर्ट (चार्जशीट) सबमिट कर दी है क्योंकि प्रॉसिक्यूशन इनके खिलाफ कुछ साबित नहीं कर पाया।
- पांच अन्य आरोपियों में शिव नारायण कालसांगरा, श्याम भवरलाल साहू, प्रवीण टक्कालकी, लोकेश शर्मा और धान सिंह चौधरी शामिल हैं।

आगे क्या होगा?


- जांच एजेंसी के मुताबिक, पुरोहित और 9 अन्य पर अब एंटी टेरर लॉ UAPA, आईपीसी, आर्म्स एक्ट और एक्प्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के प्रोविजंस के तहत मर्डर और साजिश के आरोप तय करने की कोशिश की जाएगी।

मकोका पर क्या कहा NIA ने?

- एनआईए ने कहा है कि ने कहा है कि जांच के दौरान यह पाया गया है कि इस मामले में मकोका के तहत कोई अपराध नहीं बनता है। 
- "एसपी लेवल के एक अफसर के सामने दिया गया कोई बयान सबूत के तौर पर स्वीकार्य किया जा सकता है।" 
- एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि मकोका एक्ट के प्रोविजंस के तहत एटीएस मुंबई द्वारा रिकॉर्ड इकबालिया बयान भी भरोसे लायक नहीं हैं।

पुराने रुख पर NIA ने क्या दी सफाई?

- एनआईए के डायरेक्टर जनरल शरद कुमार ने जांच एजेंसी के पुराने रुख पर कहा कि तब हमारी जांच पूरी नहीं हुई थी। उस वक्त हम एटीएस की जांच पर ही आगे बढ़ रहे थे। अब हमने अपनी जांच पूरी कर ली है और फाइनल रिपोर्ट भी सबमिट कर दी है। 
- बता दें कि एनआईए ने पहले साध्वी प्रज्ञा और अन्य की बेल का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया था। 
- चार्जशीट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर गीता गोदांबे ने स्पेशल जज एसडी तेकाले के सामने पेश की।
- हालांकि स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अविनाश रासल ने कहा कि एनआईए ने चार्जशीट फाइल करने को लेकर मुझे कोई इन्फॉर्मेशन नहीं दी थी। इसलिए मैं केस छोड़ सकता हूं।

कांग्रेस ने बोला हमला

- सीनियर लीडर दिग्विजय सिंह ने कहा- मुझे पहले से ही ऐसा लग रहा था। बीजेपी और आरएसएस ने आतंकी हमलों में शामिल संघ कार्यकर्ताओं को बचाने की कोशिश शुरू कर दी है। एनआईए के डीजी उनके मुताबिक काम कर रहे हैं। 
- मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर होम किरण रिजिजु ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा- सरकार ने एजेंसियों की जांच में कोई दखल नहीं दिया है। हमने उन्हें स्वतंत्र होकर काम करने की छूट दी है।

क्या है मामला?

- 21 सितंबर 2008 को दो ब्लास्ट हुए थे जिनमें 7 लोग मारे गए थे। जबकि 79 लोग जख्मी हुए थे।
- ब्लास्ट तब हुए थे, जब लोग रमजान के दौरान प्रेयर करके आ रहे थे।
- मामले की जांच के दौरान कई ट्विस्ट आए।
- ब्लास्ट में हिंदू राइट विंग ग्रुप्स से जुड़े लोगों का हाथ सामने आया था।

ऐसे आगे बढ़ी जांच?

- मामले की शुरुआती जांच मुंबई ATS के चीफ हेमंत करकरे ने की थी। जो 26/11 अटैक में शहीद हो गए।
- 2011 में जांच एनआईए के हाथ में जाने से पहले ATS ने इस मामले में 16 लोगों को पकड़ा था।
- ATS ने इन सभी के खिलाफ मुंबई कोर्ट में चार्जशीट 20 जनवरी 2009 और 21 अप्रैल 2011 को फाइल की। 
- पुराहित और साध्वी प्रज्ञा ने बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस चार्जशीट को चुनौती देते हुए कई एप्लिकेशन दिए।
- इस मामले में मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ आर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट) लगाने पर भी सवाल उठाए गए थे।

पिता क्लीनिक चलाते थे

- साध्वी पर मालेगांव में हुए धमाकों की साजिश रचने का आरोप है। धमाकों में 7 की मौत हो गई थी।

- करीब 14 साल की उम्र में ही प्रज्ञा का झुकाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर हो गया था।

-प्रज्ञा के पिता सीपी ठाकुर लहार के गल्ला मंडी रोड पर रहते थे और एक क्लीनिक चलाते थे।
-ठाकुर स्वयं शुरू से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे।
- प्रज्ञा कॉलेज के दिनों में ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी थीं। 
-आर्थिक स्थिति मजबूत होने पर उन्होंने सूरत में न केवल एक आश्रम बनाया, बल्कि अपनी फैमिली को वहीं बुला लिया था।

- साध्वी प्रज्ञा पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक सुनील जोशी की हत्या का भी आरोप है। संघ प्रचारक जोशी की 27 दिसंबर, 2007 को देवास में हत्या कर दी गई थी।

- प्रज्ञा को 23 अक्टूबर, 2008 में गिरफ्तार किया गया था।

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