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दिल्ली के 57 फीसदी इलाकों में गिरे प्रॉपर्टी के दाम

दिल्ली के 57 फीसदी इलाकों में गिरे प्रॉपर्टी के दाम

दिल्ली के 57 फीसदी इलाकों में गिरे प्रॉपर्टी के दाम

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राजधानी में प्रॉपर्टी कीमतों की ठंडक जारी है। तीसरी तिमाही में भी ज्यादातर इलाकों में रिहायशी प्रॉपर्टी के दाम घटे हैं। दूसरी तिमाही के मुकाबले अक्तबूर से दिसंबर 2015 के बीच 2000 से 4000 रुपए प्रति वर्गफुट की बजट रेंज में सबसे ज्यादा 19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं 17,000 से 20,000 रुपए प्रति वर्गफुट के प्रीमियम प्राइस रेंज में कीमतें सिर्फ 4 फीसदी घटी हैं।

 

हालांकि राजधानी में प्रॉपर्टी का सबसे बड़ा बाजार सैकेंडरी री-सेल का है, लेकिन यहां अंडर-कंस्ट्रक्शन के मुकाबले रेडी टु मूव-इन फ्लैटों के रेट में कोई खास फर्क नहीं रह गया है। 

 

रियल एस्टेट रिसर्च एंड कंसल्टेंसी पोर्टल मैजिकब्रिक्स डॉट कॉम की तीसरी तिमाही के प्रॉप-इंडेक्स रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में तिमाही दर तिमाही आधार पर प्रॉपर्टी कीमतों में औसतन 2.3 फीसदी की गिरावट आई है। 57 फीसदी इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें औसतन 5 फीसदी गिरी हैं, जबकि 43 फीसदी इलाकों में इनमें मामूली बढ़ौतरी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में फ्रेश इनवेंटरी काफी कम है, फिर भी निकट भविष्य में कीमतों पर दबाव बना रहेगा। 

 

रिपोर्ट के मुताबिक वसंत कुंज, मयूर विहार फेज-1, द्वारका, कैलाश कॉलोनी में मकानों के दाम 11 से 15 फीसदी तक गिरे हैं। लक्ष्मी नगर, अशोक नगर, पांडव नगर जैसे सस्ते इलाकों में औसतन 18.5 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई है। कालकाजी, पंचशील पार्क, द्वारका सेक्टर 23, रोहिणी सेक्टर-9 में कीमतें 6 से 11 पर्सेंट की दर से बढ़ी हैं।

दिलचस्प बात यह है कि लक्ष्मी नगर में प्रॉपर्टी वैल्यू में गिरावट सबसे ज्यादा हुई है, लेकिन किराए में तेजी के मामले में यह अव्वल है। अक्तूबर से दिसंबर तिमाही में यहां रेंटल वैल्यू में औसतन 9.9 फीसदी का इजाफा देखा गया, जबकि दूसरे इलाकों में रेंटल वैल्यू औसतन दो से तीन पर्सेंट ही बढ़ी है। 

द्वारका में 2 साल में कीमतें 36 फीसदी तक गिरी हैं। यहां औसत प्राइस 5600 रुपए प्रति वर्गफुट तक पहुंच चुकी थीं, जो अब औसतन 3500 रुपए वर्गफुट के आसपास आ गई हैं। उन्होंने बताया कि बायर्स की पसंद के हिसाब दिल्ली के जो टॉप इलाके उभरे हैं, उनमें द्वारका के कुछ सेक्टर, उत्तम नगर, वसंत कुंज, जनकपुरी, साकेत शामिल हैं। 

यहां साकेत को छोड़कर ज्यादातर इलाकों में पिछले दो साल में कीमतें 14 फीसदी तक गिरी हैं, जबकि साकेत में 4 फीसदी की बढ़ौतरी देखने को मिल रही है। दिल्ली में दो साल पहले तक बने बनाए मकानों के मुकाबले नए बन रहे मकानों की कीमतें औसतन 7 फीसदी ज्यादा थीं लेकिन फिलहाल दोनों एक ही स्तर पर दिखाई दे रही हैं।

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