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पॉस्को एक्ट में बदलाव के अध्यादेश को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

पॉस्को एक्ट में बदलाव के अध्यादेश को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

पॉस्को एक्ट में बदलाव के अध्यादेश को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

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नई दिल्ली। पॉस्को एक्ट में बदलाव को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी है। पॉस्को एक्ट में बदलाव के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश लेकर आई थी, जिसे कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी थी। ऐसे में इस अध्यादेश के लागू होने के बाद 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ रेप करने वाले को फांसी की सजा दी जाएगी।

अब होगी फांसी की सजा -

12 साल तक के बच्चों से बलात्‍कार के दोषियों को फांसी की सजा होगी। इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। शनिवार को प्रधानमंत्री आवास पर केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। जिसके बाद पॉक्‍सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) एक्‍ट में संशोधन किया गया। इस संशोधन के मंजूर होने के बाद 12 साल तक उम्र की बच्चियों से रेप के दोषियों को मौत की सजा दी जाएगी। पॉक्सो कानून के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार अभी तक बच्ची से रेप पर अधिकतम सजा उम्र कैद है, जो अब इस प्रस्ताव के पारित हो जाने पर फांसी हो जाएगी। 

PM ने दी थी मंजूरी -

आपको बता दें कि शनिवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 दिन के विदेश दौरे से लौटे हैं। विदेश दौरे से लौटते ही उन्होंने शनिवार 11.30 बजे केंद्रीय कैबिनेट की बैठक बुलाई और इस अध्यादेश पर चर्चा की। कैबिनेट की बैठक के एक दिन पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका के जवाब में एक पत्र देकर कहा था कि वह पॉक्सो एक्ट में संशोधन करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है, जिसके तहत 12 साल से कम की बच्चियों के साथ बलात्कार के लिए फांसी की सजा का प्रावधान होगा। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की आगामी सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

क्या है पॉस्को एक्ट?

POCSO का पूरा नाम है The Protection Of Children From Sexual Offences Act है। ये विषेष कानून सरकार ने साल 2012 में बनाया था। इस कानून के जरिए नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। वर्ष 2012 में बने इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई थी, जिसके आधार पर अभी तक अपराधियों को सजा सुनाई जाती है। 

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